पुरानी व्यवस्था की जगह सेंसर से मिलेगी सटीक जानकारी
इससे पहले पटियाला में भी रेडिएशन मापने की व्यवस्था थी लेकिन पुरानी तकनीक के कारण अपेक्षित सटीक आंकड़े नहीं मिल पा रहे थे। सेंसर आधारित नई व्यवस्था से लगातार और अधिक सटीक आंकड़े जुटाए जा सकेंगे। रियल टाइम डाटा से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सुबह से शाम तक सूर्य की किरणों की तीव्रता में कितना बदलाव आया। इन आंकड़ों की तुलना तापमान, नमी और हवा की गति जैसे दूसरे मौसम संबंधी मानकों से भी की जा सकेगी।
फसल की बढ़वार, पानी की जरूरत का होगा आकलन
सूर्य की रोशनी फसलों के विकास और प्रकाश संश्लेषण के लिए जरूरी है। अलग-अलग फसलों को धूप की अलग मात्रा चाहिए। रेडिएशन के आंकड़ों से यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी अवधि में फसलों को कितनी सौर ऊर्जा मिली। कृषि विशेषज्ञ इन जानकारियों का उपयोग फसल की बढ़वार, पानी की जरूरत और सिंचाई की योजना के आकलन में कर सकेंगे। गेहूं, धान और सब्जियों जैसी फसलों के अध्ययन में भी यह जानकारी उपयोगी हो सकती है।