बीते वर्ष चार दिसंबर को अमृतसर के हरिमंदिर साहिब में शिअद नेता सुखबीर बादल पर गोली चली थी। हालांकि इस हमले में बादल बाल-बाल बच गए। मामले में उन्होंने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता सुखबीर बादल की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए 30 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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सुखबीर बादल ने याचिका दायर करते हुए उन पर हुए हमले की जांच में पक्षपात और राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। सुखबीर ने आरोप लगाया कि 4 दिसंबर, 2024 को अमृतसर में हरिमंदिर साहिब परिसर में उन पर हुए कथित हत्या के प्रयास की जांच निष्पक्ष नहीं है। जब वह सेवा कर रहे थे तब उन पर हमला हुआ था, लेकिन सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता से यह प्रयास विफल हो गया।
याचिका में कहा गया है कि जांच एजेंसी ने एफआईआर और अंतिम रिपोर्ट में जानबूझकर तथ्यों को गलत ढंग से पेश कर मामले की गंभीरता को कम करने का प्रयास किया। एफआईआर एक ऐसे व्यक्ति के बयान पर दर्ज की गई जो प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। खुद याचिकाकर्ता का बयान कभी दर्ज नहीं किया गया, जिससे जांच की दिशा को जानबूझकर भटकाने की मंशा जाहिर होती है। उन्होंने कहा कि आरोपी एक जाना-माना आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाला व्यक्ति है। आरोपी कथित रूप से आतंकी भी है, जिसे जांच में खामियों के चलते जमानत मिल गई है।
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सुखबीर बादल ने यह भी दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान एक गहरी साजिश की तरफ इशारा करते हैं, जिसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे में उन्होंने मामले को किसी स्वतंत्र एजेंसी को स्थानांतरित करने की मांग की है, ताकि निष्पक्ष और न्यायसंगत जांच सुनिश्चित की जा सके। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि वह सुखबीर बादल के बयान आज दर्ज करने को तैयार है। सुखबीर ने अपनी याचिका में सीबीआई, एनआईए, पंजाब के डीजीपी व अन्य को प्रतिवादी बनाया है।