याची ने हाईकोर्ट में बताया कि बेसमेंट में कामर्शियल गतिविधि की शिकायत देने के बाद उस पर केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने हाईकोर्ट को जो जानकारी दी, उसके बाद कोर्ट ने याची पर जुर्माना ठोक दिया।
पत्नी के चाचा का बेसमेंट में मौजूद जिम बंद करवाकर सबक सिखाने की सनक में जनहित याचिका दाखिल करना पति को भारी पड़ गया। निजी मामलों को जनहित याचिका के माध्यम से उठाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि नियमों के अनुसार बेसमेंट में कॉमर्शियल गतिविधियों की मनाही है। इसके बावजूद पंजाब में बेसमेंट में कॉमर्शियल गतिविधियां जारी हैं। इससे लोगों की जान को हमेशा खतरा बना रहता है।
याची ने बताया कि बेसमेंट का इस्तेमाल केवल गोदाम या पार्किंग के लिए ही किया जा सकता है। इसको लेकर शिकायत देने के बाद याची पर केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया।
पत्नी से चल रहा था विवाद
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि याची का पत्नी से विवाद चल रहा है। इस मामले में याची के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था। उसी के तहत याची को गिरफ्तार किया गया था। साथ ही यह भी बताया कि याची की पत्नी के चाचा का जिम बेसमेंट में चल रहा है। याची ने अपनी पत्नी को परेशान करने के उद्देश्य से यह जनहित याचिका दाखिल की है।
इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि लोगों के आपसी विवाद के लिए जनहित याचिका का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अब याची को इस दुरुपयोग के लिए 25 हजार का जुर्माना भरना होगा। कोर्ट ने जुर्माने की राशि पीजीआई पुअर पेशेंट फंड में जमा करवाने का आदेश दिया है।