पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सोमवार को जल विवाद को लेकर सुनवाई हुई। कोर्ट के छह मई के आदेश को वापस लेने की मांग वाली अर्जी का केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने विरोध किया।
कोर्ट ने 6 मई के आदेश में भाखड़ा नंगल बांध से हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने का रास्ता साफ किया था। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति सुमित गोयल ने पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
गुरु गोबिंद सिंह के जीवन की घटना का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान केंद्र के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने गुरु गोबिंद सिंह के जीवन की एक घटना का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान भाई कन्हैया ने दुश्मन को पानी पिलाया तो इसकी शिकायत मिलने पर गुरुजी ने उन्हें बुलाया। पूछने पर कन्हैया ने कहा कि महाराज, मैंने युद्ध के मैदान में कोई मुगल या सिख नहीं देखा। मैंने केवल मनुष्य ही देखे और इसी वजह से उन्हें पानी पिलाया। गुरु जवाब सुनकर खुश हुए। जैन ने कहा कि गुरुजी ने तो दुश्मनों को भी पानी पिलाने से इनकार नहीं किया था, यहां तो पंजाब ने हरियाणा को ही पानी नहीं दिया।
पंजाब चाहता है कोर्ट फैसले पर पुनर्विचार करे
केंद्र ने कहा कि पंजाब सरकार के दो अधिकारी 2 मई को बैठक में शामिल हुए थे जहां हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने का निर्णय लिया गया था। दोनों अधिकारियों से इस मामले पर बात की गई थी लेकिन उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। पंजाब ने कहा कि उसे कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं है इसीलिए वह चाहता है कि इस पर पुनर्विचार किया जाए। वहीं हरियाणा के एजी परविंदर सिंह चौहान ने कहा कि
बीबीएमबी एक वैधानिक संस्था है जो नियमों को लागू करने और बांध से पानी आवंटित करने के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि हरियाणा पंजाब के हिस्से से पानी नहीं मांग रहा था। पंजाब सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गुरमिंदर सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता चंचल सिंगला ने दलीलों का खंडन करते हुए इस दावे को खारिज कर दिया कि पंजाब सरकार के अधिकारियों ने बैठक के
दौरान कोई आपत्ति नहीं की।