वॉशरूम भी पूरी तरह तैयार नहीं
ग्राउंड फ्लोर पर बने कुछ वॉशरूम भी पूरी तरह तैयार नहीं मिले। कई नलों की टोटियां टूटी हुई थीं और कुछ स्थानों पर पानी की आपूर्ति भी नहीं थी। कर्मचारियों का कहना है कि जिस भवन का अभी तक उपयोग शुरू नहीं हुआ, उसमें इस तरह की खामियां चिंता का विषय हैं।
वर्ष 2017 में शुरू हुआ था सेंटर का निर्माण
मदर एंड चाइल्ड सेंटर का निर्माण वर्ष 2017 में शुरू हुआ था। शुरुआती लागत 162 करोड़ रुपये थी, जो विभिन्न संशोधनों के बाद बढ़कर करीब 485 करोड़ तक पहुंच गई। वर्षों की देरी के बाद तैयार हुए इस सेंटर से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और आसपास के राज्यों के लाखों मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, लेकिन उद्घाटन से पहले सामने आई कमियों ने पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करोड़ों की मशीनों तक पहुंचा पानी
बेसमेंट और मशीनों वाले कमरों में नमी मिलने से चिंता बढ़ गई है। यहां करीब 147 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे उपकरणों के लिए पूरी तरह सूखा और नियंत्रित वातावरण जरूरी होता है।
नौ साल बाद तैयार, लागत तीन गुना बढ़ी
निर्माण शुरू : अगस्त 2017
क्षमता : 430 बेड
शुरुआती लागत : 162 करोड़ रुपये
अंतिम लागत : करीब 485 करोड़ रुपये
उद्घाटन : 17 जुलाई को प्रस्तावित
लीकेज की खबरें सही नहीं
मदर एंड चाइल्ड सेंटर में लीकेज की खबरें सही नहीं हैं। इंजीनियरिंग इंचार्ज प्रो. समीर अग्रवाल और एसएचई ले. कर्नल जीएस भट्टी के निरीक्षण में पाया गया कि बेसमेंट-1 में पाइप पर कंडेनसेशन के कारण पानी की बूंदें थीं, न कि कोई संरचनात्मक लीकेज। समस्या तत्काल दूर कर दी गई है। किसी उपकरण को नुकसान नहीं पहुंचा है और न ही उद्घाटन या संचालन की तैयारियों पर इसका कोई असर पड़ा है। सेंटर पूरी तरह सुरक्षित और तैयार है। - आधिकारिक प्रवक्ता, पीजीआई