पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि पंजाब देश के अन्न भंडार को भरता है, फिर भी केंद्रीय बजट हमारे किसानों को खाली हाथ छोड़ देता है। गेहूं और चावल के अलावा एमएसपी के लिए कोई रोडमैप नहीं, कोई डायवर्सिफिकेशन पैकेज नहीं, और बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए कोई पैसा नहीं। केंद्र सरकार ने एक बार फिर अन्नदाताओं से मुंह मोड़ लिया है।
वित्त मंत्री ने एक बार भी बजट भाषण में पंजाब का जिक्र नहीं किया
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह वड़िग ने कहा -मोदी सरकार के करीब 12 वर्षों में पंजाब को कभी भी उसका हक नहीं मिला और इस बार भी ऐसा ही हुआ। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में पंजाब का एक बार भी जिक्र नहीं किया। प्रधानमंत्री आज संत गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती मनाने के लिए पंजाब आए हैं, लेकिन इस मौके को मनाने के लिए कोई बजट आवंटन नहीं किया गया है। भाजपा सरकार कम से कम इतना तो कर सकती थी कि वे हमें गुरु रविदास जी के नाम पर एक इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी दे देते।
केंद्रीय बजट देश को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सिद्धि का मील का पत्थर- सुनील जाखड़
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा है कि केंद्रीय बजट गरीबों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और पिछड़े वर्गों पर केंद्रित है, जो 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सिद्धि का मील का पत्थर साबित होगा।
बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सुनील जाखड़ ने कहा कि यह बजट “सबका साथ, सबका विकास” की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की नीति से प्रेरित है। इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने समाज के हर वर्ग का ध्यान रखते हुए यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हों और देश में बुनियादी ढांचे का विकास हो। देश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बड़े बजट का प्रस्ताव इस बात का प्रमाण है कि भारत सरकार देश को विकसित राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि इस बजट में जहां महिलाओं के लिए “शी मार्ट” योजना लाई जा रही है, वहीं कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए प्रत्येक जिले में छात्रावास खोलने की योजना की घोषणा भी की गई है, जो महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्स इंडस्ट्री और एमएसएमई के लिए भारत सरकार द्वारा नए बजट में किए गए घोषणाओं से पंजाब के उद्योग को बड़े स्तर पर लाभ होगा। सहकारी संघवाद की नीति के तहत 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों को विकास के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई है, जिससे पूरे देश में सर्वांगीण विकास होगा।
केंद्रीय बजट ने पंजाब के किसानों को नजरअंदाज किया
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा केंद्रीय बजट ने एक बार फिर पंजाब के किसानों को नजरअंदाज किया है। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में कोई बढ़ोतरी नहीं, मंडी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कोई सपोर्ट नहीं - राज्यों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। ज़्यादा कीमत वाली फसलों का ज़िक्र किया गया है, लेकिन सिर्फ नारियल, काजू, चंदन और मेवे। उत्तर भारतीय किसानों के लिए कुछ नहीं।
शिरोमणि अकाली दल के उपाध्यक्ष डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा केंद्रीय बजट एक गहरी केंद्रीकरण वाली सोच और पंजाब की लगातार उपेक्षा को दिखाता है। एमएसपी के लिए कोई कानूनी या वित्तीय रोडमैप नहीं, खेती की बढ़ती लागत से कोई राहत नहीं, और कोई कर्ज पुनर्गठन नहीं - इसके बावजूद कि पंजाब के किसान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
पंजाब को बचाने के लिए कोई विशेष पैकेज नहीं दिया गया है, जो भारी कर्ज में डूबा हुआ है और वित्तीय आपातकाल की स्थिति में पहुंच गया है। संघवाद कमजोर हो रहा है क्योंकि राजस्व में राज्यों का हिस्सा स्थिर बना हुआ है, जबकि केंद्र प्रायोजित योजनाएँ राज्यों की प्राथमिकताओं और स्वायत्तता को कमजोर करती हैं। दलितों के कल्याण पर चुप्पी भी उतनी ही चिंताजनक है भूमिहीन दलित खेतिहर मजदूरों के लिए कोई लक्षित उपाय नहीं, पंजाब में शिक्षा, कौशल विकास या सामाजिक गतिशीलता के लिए कोई विशेष आवंटन नहीं, जहाँ दलितों की आबादी काफी ज़्यादा है।
आम आदमी को कोई वास्तविक टैक्स राहत नहीं मिलती, महंगाई का दबाव जारी है, और युवाओं की बेरोजगारी पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पंजाब भारत को खाना खिलाता है, उसकी सीमाओं की रक्षा करता है लेकिन यह बजट न तो राज्यों के साथ और न ही समाज के हाशिये पर पड़े वर्गों के साथ न्याय करता है।