आतंकवादी बता मारा, लावारिस बता कर किया अंतिम संस्कार
22 अप्रैल, 1993 को जिला मजीठा पुलिस ने अमृतसर के लोपोके थाना के तत्कालीन एसएचओ धर्म सिंह के नेतृत्व में पुलिस पार्टी, सीआईए स्टाफ और सीआरपीएफ पार्टी के साथ मुठभेड़ में दो अज्ञात आतंकवादियों को मारने का दावा किया। इस संबंध में 23 अप्रैल 1993 को थाना लोपोके में मामला दर्ज किया गया। उनके शवों का लावारिस के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया गया। हैरानी की बात है कि इस कथित मुठभेड़ मामले में एक सप्ताह के भीतर ही इंस्पेक्टर धर्म सिंह, तत्कालीन एसएचओ थाना लोपोके ने अनट्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें उल्लेख किया गया कि शवों की पहचान नहीं की गई है और आगे जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।
पुलिस ने दस्तावेजों में भी की हेराफेरी
सीबीआई जांच में यह साफ हुआ कि लोपोके पुलिस की ओर से 22 अप्रैल 1993 को मुठभेड़ में मारे गए दिखाए गए दो युवक वास्तव में सुखविंदर सिंह और सुरमुख सिंह थे। सीबीआई जांच में यह भी साबित हुआ कि मुठभेड़ को वास्तविक साबित करने के लिए पुलिस ने दस्तावेजों में हेराफेरी की थी। सीबीआई ने 26 दिसंबर 1995 को प्रारंभिक जांच दर्ज की। दिलदार सिंह की पत्नी बलबीर कौर ने आरोप लगाया कि उसके बेटे सुखविंदर सिंह की हत्या कर दी गई है। 28 फरवरी 1997 को मामला दर्ज किया गया। जांच में मुठभेड़ को फर्जी पाया गया। अब कोर्ट ने पूर्व एसपी को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है जबकि तीन पुलिसकर्मी सबूतों के अभाव में बरी हो गए।