अमृतपाल की शादी हो चुकी है और उनकी तीन महीने की बेटी है। उनके पास सीमा के पार 8.5 एकड़ जमीन है जिसमें परिवार खेती करता है। जुगराज सिंह ने बताया कि अमृतपाल उस दिन दोपहर अपनी बाइक से खेत के लिए निकले थे, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटे। बीएसएफ ने गेट को शाम होने से पहले दोबारा खोला और उनकी तलाश की, लेकिन उनका पता नहीं चला। बता दें कि गर्मी के महीनों में, फिरोजपुर, फाजिल्का, गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर और तरन तारन जैसे सीमावर्ती जिलों के किसानों को बीएसएफ की सख्त निगरानी में सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक कांटेदार बाड़ और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच बने "जीरो लाइन" क्षेत्र में अपने खेतों तक जाने की अनुमति है।
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