जानकारी के अनुसार, अक्तूबर 2000 में गांव कोटला निवासी एक परिवार शादी समारोह से लौट रहा था। वैन में तीन वयस्क और एक आठ वर्षीय बच्चा सवार था। इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर भाखड़ा नहर में गिर गया। गोताखोरों और स्थानीय लोगों ने करीब एक महीने तक तलाश अभियान चलाया लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
हाल ही में इलाके के समाजसेवी और गोताखोर कमलप्रीत सैनी एक अन्य व्यक्ति के शव की तलाश में भाखड़ा नहर में उतरे थे। इसी दौरान उन्हें नहर की गहराई में एक वाहन दिखाई दिया। उन्होंने वाहन को रस्सियों से बांध दिया और बाद में स्थानीय लोगों तथा ट्रैक्टर की मदद से उसे बाहर निकाला गया।
वैन की छत हो चुकी थी क्षतिग्रस्त
कमलप्रीत सैनी ने बताया कि वैन का पिछला हिस्सा और छत जंग लगने के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं जबकि अगला हिस्सा कुछ हद तक सुरक्षित मिला। उन्होंने दावा किया कि वाहन के अगले हिस्से से मानव कंकाल के कुछ अवशेष और एक कमीज भी मिली है जो संभवतः मृत बच्चे की हो सकती है।
बरामद वस्तुएं परिवार को सौंप दी गई हैं। सैनी ने बताया कि नहर के तल में तेज पानी का बहाव होने के कारण वाहन को बाहर निकालना बेहद मुश्किल था। उन्होंने बाद में मृतकों के परिजनों से संपर्क किया, जिनके आग्रह पर वैन को बाहर निकालने का अभियान चलाया गया। 26 साल बाद वैन के बाहर आने से गांव में पुराने हादसे की यादें फिर ताजा हो गई हैं।