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पंजाब में बिजली संकट: मंत्री अमन अरोड़ा की बिजली कर्मियों को दो टूक, तानाशाही रवैया नहीं होगा बर्दाश्त

Sun, 26 Jul 2026 02:23 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम

सार

मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा केवल 18,500 कर्मचारियों की वजह से आज पूरे पंजाब के 3 करोड़ लोग अंधेरे और भारी परेशानी में जीने को मजबूर हैं। 
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कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब में जारी बिजली विभाग की कर्मचारियों की हड़ताल पर आम आदमी पार्टी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में हड़ताली कर्मचारियों को आड़े हाथों लेते हुए सीधा आरोप लगाया कि वे आम जनता और किसानों को मोहरा बनाकर सरकार को दवाब में लाने का गंदा खेल खेल रहे हैं। 
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18 हजार कर्मचारियों की जिद्द से 3 करोड़ जनता परेशान
मंत्री अमन अरोड़ा ने तीखे लहजे में कहा कि केवल 18,500 कर्मचारियों की वजह से आज पूरे पंजाब के 3 करोड़ लोग अंधेरे और भारी परेशानी में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि जनता को परेशान करके, किसानों की खेती पर लात मारकर सरकार की बांह मरोड़ना और मांगें मनवाना किस हद तक सही है? यह तरीका कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

धान की बुआई पर बिजली संकट 
मंत्री ने किसानों के दर्द का हवाला देते हुए कहा कि यह समय धान की रोपाई (जीरी की लवाई) का पीक सीजन है। उन्होंने एक पीड़ित पट्टेदार किसान का जिक्र करते हुए कहा कि एक गरीब किसान 3 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर खेती कर रहा है, लेकिन हड़ताल की वजह से उसकी रोजी-रोटी पर लात पड़ रही है। इसमें उस बेकसूर किसान का क्या कसूर है?  जब कमेटी बन चुकी है तो हड़ताल का ड्रामा क्यों?
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मंत्री अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों की मांग पर ही 20-25 दिन पहले फाइनेंस, पावर और पर्सनल विभाग के अफसरों के साथ खुद कर्मचारियों के चार नुमाइंदों को मिलाकर एक स्पेशल कमेटी बनाई गई थी। जब बातचीत और समाधान का दौर जारी है, तो अचानक हड़ताल पर जाकर पंजाब की जनता को ब्लैकमेल क्यों किया जा रहा है?

मान सरकार का सख्त संदेश
मंत्री अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि भगवंत मान सरकार, वित्त मंत्री हरपाल चीमा और बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जो भी वाजिब मांगें होंगी, वे मानी जाएंगी। लेकिन साथ ही उन्होंने दो टूक चेतावनी भी दी कि ब्लैकमेलिंग और प्रेशर पॉलिटिक्स को अच्छे रूप में नहीं देखा जाएगा। कर्मचारी तुरंत हड़ताल खत्म करें और बिजली सप्लाई बहाल करें, वरना इस तानाशाही रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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