पंजाब में स्टोरेज संकट की वजह से बीते चार सालों में 8,191 मीट्रिक टन (एमटी) अनाज खराब हो चुका है। देशभर में अनाज खराब होने का यह आंकड़ा सबसे अधिक है।
चिंताजनक बात ये है कि 2022-23 में करीब 264 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ था लेकिन अगले वित्त वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा करीब 29 गुना बढ़कर 7746 मीटिंग टन पहुंच गया। इस देश में जहां हर साल सैकड़ों लोग भूख से मर जाते हैं, वहां इस तरह के आंकड़े हैरानीजनक हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीसी) के तहत इस खराब हुए अनाज से 16 लाख लोगों का पेट भरा जा सकता था।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार हर साल खराब हो रहे अनाज की मात्रा में बढ़ोतरी होती जा रही है, जो स्टोरेज प्रबंधन पर सवाल खड़े करती है।
हर साल बढ़ रही बर्बादी
वर्ष 2019-20 में 56 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ था। वर्ष 2020-21 में घटकर 25 मीट्रिक टन रह गया। वर्ष 2021-22 में इसमें उछाल आया और 100 मीट्रिक टन अनाज ख्रराब हुआ। 2022-23 में 264 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ और फिर कई गुना बढ़कर 2023-24 में यह आंकड़ा 7746 मीट्रिक टन हो गया।
इन डिपो में सबसे अधिक चावल व गेहूं खराब
रोपड़ डिपो में सबसे अधिक चावल व गेहूं खराब हुआ है। यहां 1483 मीट्रिक टन गेहूं और 1198 मीट्रिक टन चावल खराब हुआ है। इसके बाद ही बठिंडा में दूसरे नंबर 1753 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ, जिसमें 1704 मीट्रिक टन गेहूं और 49.58 मीट्रिक टन चावल शामिल है। इसी तरह संगरूर में 1326 मीट्रिक टन गेहूं और मोरिंडा में 1130 मीट्रिक टन कुल अनाज खराब हुआ, जिसमें 18.07 एमटी गेहूं और 1112 एमटी चावल शामिल है। बलाचौर होशियारपुर में 303 एमटी, पटियाला 87.3 एमटी, कोटकपुरा फरीदकोट में 270 एमटी, खमानों 70.45 एमटी, जालंधर 35 एमटी, पटियाला 54.85 एमटी, मोगा की दो साइलो 3.195 और 28.789 एमटी अनाज खराब हुआ है।
जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ होती है कार्रवाई
एफसीआई की तरफ से अनाज खराब होने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। एफसीआई मुख्य रूप से गेहूं और चावल की खरीद करता है। स्टोरेज अनाज की नियमित रूप से निगरानी करने का दावा किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ व अधिक बारिश के कारण अनाज के खराब होने का खतरा रहता है। नुकसान की निगरानी के लिए मंडल, क्षेत्रीय, जोनल कार्यालयों के स्तर पर नुकसान निगरानी सैल स्थापित किए गए हैं, जिसके जरिए खराब अनाज का रिकाॅर्ड तैयार किया जाता है।