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चंडीगढ़ पुलिस कमाल है: पांच दिन में भी न पीड़ित का बयान लिया, न एफआईआर की; थार हादसे में दिखी हद लापरवाही

Mon, 05 Oct 2026 09:10 AM IST
Nivedita परीक्षित सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

29 सितंबर को सारंगपुर क्षेत्र में निम्स के पास थार ने नसीम की बाइक को टक्कर मारी थी। नसीम के हाथ में गंभीर चोट आई और ऑपरेशन कर प्लेट डालनी पड़ी। उसकी बहन नूर साब्बया का आरोप है कि थार रॉन्ग साइड से आ रही थी। हादसे के बाद पुलिस चालक को थाने ले गई थी लेकिन बाद में छोड़ दिया। आरोपी वाहन भी पुलिस ने कब्जे में नहीं लिया।
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चंडीगढ़ पुलिस का हाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ में पांच दिन पहले सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 19 वर्षीय डिलीवरी ब्वॉय नसीम खान अस्पताल में भर्ती है। उसके हाथ का ऑपरेशन कर प्लेट डाली जा चुकी है लेकिन पुलिस अब तक उसका बयान लेने तक नहीं पहुंची और न एफआईआर दर्ज की। 

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परिवार का आरोप है कि कार्रवाई के बजाय पुलिस उस पर समझौते का दबाव बना रही है। दूसरी पार्टी के इलाज का खर्च उठाने की बात कहकर मामला खत्म करने के लिए कहे जाने की बातचीत की रिकॉर्डिंग भी अमर उजाला के पास मौजूद है। पुलिस ने हादसे के बाद आरोपी थार चालक को पकड़ा जरूर, लेकिन बाद में छोड़ दिया। थार भी जब्त नहीं की। अब पांच दिन बाद पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठने के बाद वरिष्ठ अधिकारी ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

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एक दिन अनफिट, फिर चार दिन पुलिस ने क्या किया
पुलिस का कहना है कि हादसे के बाद अस्पताल में डॉक्टर ने नसीम को बयान देने के लिए अनफिट बताया था। सवाल है कि इसके बाद चार दिन तक पुलिस ने क्या किया? क्या दोबारा डॉक्टर से उसकी फिटनेस के बारे में राय ली गई? क्या पुलिस किसी दिन अस्पताल पहुंची? क्या डॉक्टर ने दोबारा उसे बयान के लिए अनफिट बताया? पुलिस इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी। वहीं परिवार का कहना है कि नसीम हादसे के बाद से बातचीत कर रहा था। ऐसे में अस्पताल के रिकॉर्ड से यह साफ हो सकता है कि वह कब से बयान देने की स्थिति में था। यदि वह बयान देने की स्थिति में था तो पुलिस ने उसका बयान क्यों नहीं लिया।

चालक पकड़ा तो छोड़ क्यों दिया, थार भी क्यों नहीं की जब्त
पुलिस के अनुसार थार चालक निम्स का छात्र है। उसका दावा है कि कुछ लोग लाठी-डंडों और हथियारों के साथ उसका पीछा कर रहे थे और जान बचाने के दौरान वह रॉन्ग साइड में पहुंचा जिससे नसीम की बाइक से टक्कर हुई। यदि पुलिस ने चालक को पकड़ लिया था तो उसका मेडिकल क्यों नहीं कराया गया? शराब या नशे की जांच हुई या नहीं? थार की मैकेनिकल जांच क्यों नहीं कराई गई? वाहन को कब्जे में न लेने का कारण क्या है?

सीसीटीवी और डीडीआर से साफ हो सकता है घटनाक्रम
निम्स और आसपास के चौराहों, सड़क कट और प्रतिष्ठानों के सीसीटीवी फुटेज से थार की दिशा, रफ्तार और हादसे का घटनाक्रम साफ हो सकता है। चालक के पीछा किए जाने के दावे की भी फुटेज से पुष्टि की जा सकती है। 29 सितंबर की पुलिस कंट्रोल रूम की सूचना, डीडीआर में दर्ज समय और अस्पताल पहुंचने के समय का मिलान भी जांच में अहम होगा।

एमएलसी में चोट, फिर भी एफआईआर के लिए बयान का इंतजार क्यों?
नसीम की एमएलसी में चोट की प्रकृति दर्ज है और उसका ऑपरेशन हो चुका है। परिवार के मुताबिक पुलिस को घटना की जानकारी पहले ही मिल गई थी और कार्रवाई की मांग भी की गई थी। ऐसे में शिकायत या डीडीआर में सूचना दर्ज होने के बावजूद एफआईआर केवल घायल के बयान के इंतजार में क्यों रोकी गई, यह भी सवाल है।

आईओ बोले- दोनों पक्षों में समझौते की बात हुई
जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर तेजेंद्र सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों में बातचीत हुई थी और वे समझौते की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद डॉक्टर ने घायल को अनफिट बताया था इसलिए उसका बयान दर्ज नहीं हो सका।

एसडीपीओ बोले- समझौता कराना पुलिस का काम नहीं
एसडीपीओ सेंट्रल चंडीगढ़ एसपीएस सोंधी ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। हादसे में ऐसी चोट आई है तो कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। पांच दिन बाद भी एफआईआर क्यों नहीं हुई, इसकी जांच की जाएगी। पुलिस का काम कानूनी कार्रवाई करना है, समझौता कराना नहीं। मामले की पूरी जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।
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