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पंजाब पर कर्ज का बोझ: ऋण-जीएसडीपी अनुपात में देश भर में दूसरा नंबर, संसद में पेश की गई आरबीआई रिपोर्ट

Wed, 18 Dec 2024 08:49 AM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

ऋण-जीएसडीपी अनुपात में पंजाब देश भर में दूसरे नंबर पर है। राज्य का ऋण-जीएसडीपी अनुपात 47.6 फीसदी है। पंजाब पर 3.51 लाख करोड़ का कर्ज है। केवल अरुणाचल प्रदेश ही राज्य से आगे है, जिसका ऋण-जीएसडीपी अनुपात सबसे अधिक 50.4 फीसदी है। 
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भगवंत मान - फोटो : X @BhagwantMann
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विस्तार
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पंजाब पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जो राज्य सरकार के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। सरकार की तरफ से कर्ज को कम करने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन वे नाकाफी साबित हो रहे हैं। 

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ऋण-जीएसडीपी अनुपात में पंजाब देश भर में दूसरे नंबर पर है। राज्य का ऋण-जीएसडीपी अनुपात 47.6 फीसदी है। पंजाब पर 3.51 लाख करोड़ का कर्ज है। केवल अरुणाचल प्रदेश ही राज्य से आगे है, जिसका ऋण-जीएसडीपी अनुपात सबसे अधिक 50.4 फीसदी है। 

लोकसभा में पेश की गई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की 2023-24 की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी की तरफ से एक सवाल के जवाब में यह रिपोर्ट पेश की गई है।

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आय के स्रोत बढ़ाने पर करना होगा काम

वर्ष 2019-20 में पंजाब सरकार पर करीब 2.29 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 3.51 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। प्रदेश में आर्थिक संकट और राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए सरकार नए रोडमैप पर भी काम कर रही है, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों की माने तो सरकार को अपने आय के स्रोत बढ़ाने के लिए काम करना होगा। इसी तरह मुफ्त की योजनाओं पर भी कुछ लगाम लगानी होगी, तभी जाकर राज्य इस कर्ज के जाल से बाहर निकल पाएगा। 

1986 में राज्य को कैश सरप्लस माना जाता था, लेकिन मुफ्त चुनावी घोषणाओं ने प्रदेश को आर्थिक संकट में धकेल दिया है। अकाली-भाजपा, कांग्रेस और अब फिर आम आदमी पार्टी की सरकार में भी यह संकट कम नहीं हो रहा है। हालत यह है कि पिछले पांच साल में ही प्रदेश पर 34 फीसदी से ऊपर कर्ज बढ़ गया है।
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बिजली सब्सिडी सरकार के लिए बनी बड़ी समस्या 

प्रदेश सरकार के लिए बिजली सब्सिडी सबसे बड़ी समस्या बन गई है। प्रदेश में प्रत्येक कनेक्शन पर 300 यूनिट प्रति माह निशुल्क बिजली दी जाती है। सरकार ने विधानसभा चुनाव में किया अपना वादा तो पूरा कर दिया, लेकिन अगर इसका दूसरा पहलू देखें तो बिजली सब्सिडी पर सरकार का करीब 20 से 22 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहा है। 16वें वित्तीय कमीशन की बैठक में भी बिजली सब्सिडी का विकल्प खोजने के लिए सरकार को कहा गया था।

घाटा कम करने के लिए सरकार उठा रही कदम 

सरकार की तरफ से राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट लागू किया गया है, जिसके तहत टैक्स का दायरा बढ़ाया गया। इसी तरह अलग-अलग विभागों में बकाया राशि वसूलने के लिए अभियान शुरू किया गया है। फिजूलखर्ची और घाटे को भी कम करने का प्रयास किया जा रहा। सरकार ने पेट्रोल पर 61 पैसे और डीजल पर 92 पैसे प्रति लीटर वैट बढ़ाया था। इससे सरकार को 545 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व जुटाने की उम्मीद है।

पंजाब में कर्ज के बोझ व ऋण-जीएसडीपी अनुपात को कम करने के लिए आय के स्रोत बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही मुफ्त की योजनाओं को भी कम करने की आवश्यकता है। साथ ही हालात सुधारने के लिए राज्य में नया निवेश लाने के लिए भी प्रयास करने होंगे। - स्मिता शर्मा, प्रोफेसर अर्थशास्त्र, पंजाब विश्वविद्यालय
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