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रशदीप का कॉमनवेल्थ गेम्स में चयन: गांव के तानों को ट्रैक पर रौंदा, मां ने बेटी के सपनों के लिए बेचे थे गहने

Wed, 17 Jun 2026 04:11 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम (पंजाब)

सार

मुख्यमंत्री भगवंत मान के इलाके की बेटी रशदीर कौर का चयन राष्ट्रमंडल खेलों के लिए हुआ है। रशदीप ने महज आठ साल की उम्र में रनिंग शुरू कर दी थी। 
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PUNJAB - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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"कुड़ियां नूं बाहर ना भेजो... जिथे मुंडे खेडदे हण, उथे कुडी नूं क्यों ले जांदे हो?" यह वो कड़वे ताने थे, जो संगरूर जिले के गंडुआं गांव के किसान गुरलाल सिंह को रोज सुनने पड़ते थे। दो एकड़ जमीन के सहारे परिवार पालने वाले इस पिता के पास तब गांव के तानों का कोई जवाब नहीं था, लेकिन उनकी चमकती आंखों में एक जिद थी। आज उसी जिद ने इतिहास रच दिया है।

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गुरलाल सिंह की 23 वर्षीय एथलीट बेटी रशदीप कौर का चयन राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भारतीय टीम में हो गया है। वह 4x400 मीटर रिले रेस में भारत की तरफ से हुंकार भरेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान के इलाके की बेटी ने साबित कर दिया कि यदि हौसले बुलंद हों तो उड़ान भरने से कोई नहीं रोक सकता।

एक मां का वो 'गुप्त बलिदान' जो बेटी आज भी नहीं जानती। इस कामयाबी के पीछे सिर्फ पसीना नहीं, बल्कि मां के गहनों का त्याग भी छुपा है। रशदीप की मां गुरपिंदर कौर ने एक भावुक खुलासा करते हुए बताया कि एक बार रशदीप को बड़ी प्रतियोगिता में भेजने और टिकट का खर्च उठाने के लिए घर में पैसे नहीं थे। तब उन्होंने अपनी सोने की चेन बेच दी थी। भावुक होते हुए रशदीप की छोटी बहन ने बताया कि मां ने मुझसे कहा था कि यह बात दीदी (रशदीप) को कभी मत बताना, वरना वो खेल पर ध्यान नहीं दे पाएगी। रशदीप को इस बलिदान की भनक नहीं है पर उस दिन मैंने खुद से वादा किया था कि जब दीदी कामयाब होगी, तो हम उसके लिए कई सोने के हार खरीदेंगे।

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रूढ़ियों की दीवार ढहाई, तीनों बेटियों को बनाया नेशनल प्लेयर
जब रशदीप महज आठ साल की थी, तब पिता ने उसके भीतर की दौड़ने की प्रतिभा को पहचान लिया था। वो उसे लेकर गांव के मैदान में जाने लगे। समाज ने टोकना शुरू किया, लेकिन पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने न सिर्फ रशदीप बल्कि अपनी बाकी दो बेटियों (सुखमणि और रंजीत कौर) को भी मैदान में उतार दिया। समाज के तानों को अपनी जूतों तले रौंदते हुए गुरलाल सिंह की तीनों बेटियां राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं। रशदीप की सबसे छोटी बहन रंजीत कौर नेशनल लेवल की खो-खो खिलाड़ी है।

 "सपने सच हो रहे हैं..."
जैसे ही कॉमनवेल्थ गेम्स की टीम में चयन की आधिकारिक मुहर लगी, रशदीप ने जालंधर से अपने गांव फोन किया और रोते हुए सिर्फ इतना कहा— "माँ-पापा, हमारे सपने सच हो रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जो ग्रामीण कभी गुरलाल सिंह को ताने देते थकते नहीं थे, अब उनके घर पर बधाई दे रहे हैं। पंजाब की इस बेटी ने साबित कर दिया है कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो बंदिशों का हर पिंजरा छोटा पड़ जाता है।
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