लॉरेंस बिश्नोई के हिरासत में हुए इंटरव्यू के मामले में अभी तक किसी बड़े अधिकारी का नाम सामने न आने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि जांच सिरे नहीं चढ़ी तो मामला बंद नहीं किया जाएगा बल्कि जांच सीबीआई को सौंप दी जाएगी। इस एसआईटी में एक और ईमानदार अफसर की जरूरत है और आईपीएस ध्रुव दहिया को एसआईटी में सदस्य के रूप में शामिल किया जाए।
बुधवार को सुनवाई शुरू होते ही प्रबोध कुमार की अध्यक्षता वाली एसआईटी से हाईकोर्ट ने पूछा कि किसके आदेश पर लॉरेंस को सीआईए थाने में इतने लंबे समय तक मामूली मामले में रखा गया। कोर्ट ने कहा कि अभी तक किसी उच्च अधिकारी का नाम सामने नहीं आया है। अगर आप असहाय महसूस कर रहे हैं तो हमें बता दीजिए हम अन्य एजेंसी को जांच दे देंगे। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक लॉरेंस को यहां रखा गया और बलि का बकरा एक डीएसपी स्तर के अधिकारी को बना दिया गया। बिना उच्च अधिकारी के स्पष्ट आदेश के ऐसा किया ही नहीं जा सकता।
पूरे मामले को दबाने का प्रयास
हाईकोर्ट ने कहा कि इंटरव्यू सामने आने के बाद इस पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया। पंजाब सरकार ने जो एसआईटी बनाई थी और इंटरव्यू पंजाब में होने को नकार दिया था। यह सब कवरअप की प्रक्रिया थी। यह किसी उच्च अधिकारी या अधिकारियों के दल को बचाने का प्रयास था। कोर्ट ने कहा कि लॉरेंस के इंटरव्यू के बाद पंजाब में अपराध में वृद्धि हुई है। स्थिति कितनी खराब हुई है इसका पता लगाने के लिए 15 जुलाई तक हुए अपराधों का रिकॉर्ड डीजीपी दें। साथ ही यह भी बताया जाए कि पंजाब सरकार ने अपराध को रोकने के लिए क्या कदम उठाए। बर्खास्त डीएसपी ने कहा कि मेरी सेवाएं बिना किसी जांच के समाप्त कर दी गईं। फिरौती, रंगदारी, धमकी व इस प्रकार के अन्य अपराधों से जुड़ा आंकड़ा सरकार को सौंपना होगा।