पंजाब पुलिस पूर्व महिला इंस्पेक्टर अर्शप्रीत कौर गरेवाल ने मंगलवार को मोगा की जिला अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। आरोपी महिला अर्शप्रीत कौर ने एडिशनल सेशन जज रबीइंदर कौर की कोर्ट में सरेंडर किया। वह रिश्वत व नशा तस्करी (एनडीपीएस एक्ट) मामले में करीब एक साल से फरार चल रही थी।
मामले के अनुसार 1 अक्तूबर 2024 को तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर अर्शप्रीत कौर गरेवाल और मुंशी गुरप्रीत सिंह ने एक आरोपी व्यक्ति अमरजीत सिंह से 2 किलो अफीम बरामद की थी और उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बाद में पुलिस जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि अमरजीत सिंह के साथ उसके दो साथी और थे, जिनसे 3 किलो अफीम बरामद हुई थी। आरोप है कि उन्हें छोड़ने के लिए महिला इंस्पेक्टर ने 8 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। जिसमें से 5 लाख रुपये इंस्पेक्टर अर्शप्रीत कौर, कांस्टेबल गुरप्रीत सिंह और राजपाल सिंह ने लिए थे। पुलिस ने इस मामले की जांच के बाद मोगा के थाना कोट ई सेखा में अर्शप्रीत कौर गरेवाल, गुरप्रीत सिंह, राजपाल सिंह और मनप्रीत सिंह के खिलाफ करप्शन एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।
मामला दर्ज होने के बाद अर्शप्रीत कौर करीब नौ महीने तक फरार रही और अदालत में पेश नहीं हुईं। अदालत में लगातार अनुपस्थित रहने पर 31 जुलाई 2025 को मोगा की अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। भगोड़ा घोषित होने से पहले अर्शप्रीत कौर ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न और बदले की भावना से झूठा केस दर्ज कराने के आरोप लगाए थे। उसने दावा किया था कि यह मामला उनके खिलाफ प्रतिशोध की कार्रवाई है। अब करीब एक साल बाद भगोड़ा घोषित लेडी इंस्पेक्टर अर्शप्रीत कौर गरेवाल ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया अदालत 20 अक्तूबर तक ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है।