पंजाब कांग्रेस में प्रधान पद के दावेदार अगले सप्ताह अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए शक्ति प्रदर्शन करेंगे, क्योंकि प्रदेश कांग्रेस के नव नियुक्त प्रभारी भूपेश बघेल ने अगले हफ्ते पंजाब दौरे पर आना है।
दावेदारों की तरफ से इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई है। प्रधान पद की दौड़ में सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला, विधायक राणा गुरजीत सिंह और परगट सिंह प्रबल दावेदार हैं।
हाल ही में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की तरफ से भूपेश बघेल को पंजाब कांग्रेस के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी नियुक्ति के बाद से ही प्रदेश प्रधान बदलने की चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। यही वजह है कि दावेदारों ने दिल्ली तक जाकर भी शीर्ष नेतृत्व से जाकर मुलाकात की। साथ ही प्रभारी की पंजाब में आने की सूचना के बाद सभी दावेदार सक्रिय हो गए हैं, ताकि वे मजबूती से अपनी दावेदारी पेश करें।
पार्टी में चर्चा है कि विजय इंदर सिंगला शहरी व व्यापारी वर्ग में मजबूत पकड़ रखते हैं, जिसके चलते उनके नाम पर भी पार्टी विचार कर रही है। हालांकि, अगर कांग्रेस दलित कार्ड खेलती है तो सांसद चरणजीत सिंह चन्नी पहली पसंद हो सकते हैं। पार्टी वरिष्ठ नेताओं के अनुसार चन्नी उन दावेदारों में शामिल है, जिनके नाम पर विरोध भी कम है। पिछले कुछ दिनों से चन्नी को पार्टी के अंदर बड़ी जिम्मेदारी देने की चर्चा भी चल रही है।
इसी तरह सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी प्रमुख दावेदारों में से एक है। वह डेरा बाबा नानक से तीन बार विधायक रहे और अब सांसद है। साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता भी है। इसी तरह विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा भी प्रधानगी की दौड़ में शामिल है, लेकिन उनके पास पहले ही नेता प्रतिपक्ष का पद है। वह पहले भी प्रधान रह चुके हैं, जिसके चलते उनके प्रधान बनने की संभावना कम है।
परगट व राणा गुरजीत सिंह भी प्रबल दावेदार
इसी तरह विधायक परगट सिंह और राणा गुरजीत सिंह भी प्रधान पद के प्रबल दावेदार है। राणा गुरजीत सिंह पिछले कुछ समय से अधिक सक्रिय हो गए हैं। यहां तक कि उन्होंने पंजाब कांग्रेस के मौजूदा प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर सार्वजनिक रूप से हमला बोलना भी शुरू कर दिया है और पिछले चुनावों में अपनी टिकट कटने के लिए वड़िंग पर आरोप लगाया है। हाईकमान के लिए पंजाब कांग्रेस का प्रधान चुनना आसान नहीं है, क्योंकि पिछले कुछ समय से पार्टी के अंदर गुटबाजी बढ़ती जा रही है। हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को एकजुट रखने की है।