सतलुज यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) के मुद्दे पर एक बार फिर पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री आमने-सामने आ गए हैं। संगरूर के भवानीगढ़ में एसडीएम कॉम्पलेक्स के उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा कि उनके पास हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के लिए नहीं हैं। सीएम मान ने कहा कि एसवाईएल कभी हकीकत नहीं बनेगी।
मान हरियाणा के सीएम नायब सैनी द्वारा की गई टिप्पणी का जवाब दे रहे थे।
मान ने कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए पानी की एक भी बूंद नहीं है और सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर कभी हकीकत में नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि वॉटर ट्रिब्यूनल के साथ बैठक में उन्होंने बीते दिनों सरकार की ओर से अपना पक्षा रखा है। उन्होंने ट्रिब्यूनल को बताया कि 50 साल पहले जो संधि हुई थी, तब भूजल से लेकर नहरी पानी की स्थिति प्रदेश में कुछ और थी, आज हालात बदल चुके हैं। पंजाब का भूजल स्तर नीचे जा चुका है और नहरी पानी के जरिए वह अपनी जरूरतों को बड़ी मुश्किल से पूरा कर पा रहे हैं।
ट्रिब्यूनल बीते दिनों से पंजाब दौरे पर
सीएम मान ने कहा कि वॉटर ट्रिब्यूनल बीते दिनों से पंजाब दौरे पर है। तलवाड़ा, नंगल और प्रदेश के अन्य हिस्सों में ट्रिब्यूनल दौरा कर पानी की मौजूदा स्थिति का आंकलन कर रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार राज्य में पानी की उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन करना जरूरी है। सीएम ने कहाकि हाल ही में राबी ब्यास ट्रिब्यूनल, जो कि राबी जल प्रणाली से संबंधित स्थानों पर जाने के लिए राज्य के दौरे पर है, उसे भी अपील की है कि वह नए सिरे से पुनर्मूल्यांकन करके राज्य के लोगों को न्याय दिलाए। राज्य के अधिकतर ब्लॉकों का पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया है और राज्य में धरती के नीचे का पानी की स्थिति बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि क्योंकि राज्य के अधिकांश नदियों के स्रोत सूख गए हैं, इसलिए इसे अपनी सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए और पानी की जरूरत है।