डिफॉल्टरों पर करीब 52 करोड़ रुपये बकाया
बैठक में छोटे फ्लैट योजना और अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के करीब 13 हजार रेंट डिफॉल्टरों को राहत देने का भी फैसला लिया गया। अब बकाया राशि एकमुश्त जमा कराने के बजाय आसान मासिक किस्तों में जमा कराई जाएगी ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर एक साथ भुगतान का बोझ न पड़े।
सीएचबी के अनुसार छोटे फ्लैट योजना और अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के डिफॉल्टरों पर करीब 52 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसमें लगभग 25 करोड़ रुपये मूल किराया और 27 करोड़ रुपये ब्याज शामिल है। बोर्ड जल्द ही किस्तों में भुगतान की विस्तृत नीति जारी करेगा।
मास्टर प्लान-2031 के बाद मिलेगा अंतिम स्वरूप
बैठक में वर्ष 2018 से लंबित 492 फ्लैटों वाली सेक्टर-53 जनरल हाउसिंग स्कीम पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के लिए पहले तीन बार डिमांड सर्वे कराया गया था, लेकिन पर्याप्त आवेदन नहीं मिलने के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अब मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधनों को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद नई विकास नीति और शहर की जरूरतों के अनुरूप इस योजना को दोबारा तैयार किया जाएगा।
पूरे शहर के लिए बनेगी समान लॉक-इन पॉलिसी
बैठक में शामिल बोर्ड सदस्य शक्ति प्रकाश देवशाली ने बताया कि केवल सेक्टर-51ए की स्कीम तक राहत सीमित रखने के बजाय पूरे शहर की सीएचबी हाउसिंग योजनाओं के लिए एक समान लॉक-इन नीति बनाने पर सहमति बनी है। इसके चलते फिलहाल सेक्टर-51ए की योजना में अलग से लॉक-इन अवधि समाप्त करने का प्रस्ताव टाल दिया गया।
नई नीति तैयार करेगा सीएचबी
अब सीएचबी पूरे शहर के लिए नई नीति तैयार करेगा, जिसके तहत मौजूदा 10 वर्ष की लॉक-इन अवधि को घटाकर पांच वर्ष करने का प्रस्ताव है। नई नीति लागू होने के बाद विभिन्न हाउसिंग स्कीमों के आवंटी पांच वर्ष पूरे होने पर अपने फ्लैट या मकान की बिक्री अथवा हस्तांतरण कर सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे अलग-अलग योजनाओं के लिए अलग नियम रखने की आवश्यकता समाप्त होगी और सभी आवंटियों को समान लाभ मिलेगा।
बैठक में अधिकारियों ने भरोसा जताया कि मास्टर प्लान-2031 को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद शहर की नई हाउसिंग स्कीमों, पुनर्विकास परियोजनाओं और किफायती आवास योजनाओं को गति मिलेगी। साथ ही एक समान लॉक-इन पॉलिसी और रेंट डिफॉल्टरों के लिए आसान भुगतान व्यवस्था से हजारों आवंटियों को राहत मिलेगी तथा भविष्य की आवासीय योजनाओं के क्रियान्वयन में भी पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित होगी।