बरसात के कारण हरियाणा सरकार के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी, पांच मंत्रियों, दो न्यायाधीशों, एडवोकेट जनरल, एडिशनल एडवोकेट जनरल, विपक्ष के नेता, चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और चंडीगढ़ प्रशासन के चीफ इंजीनियर के सरकारी आवास में पानी भरने से सामान खराब हो गया।
मानसून की पहली ही बारिश ने चंडीगढ़ के सबसे वीवीआईपी और पॉश इलाके सेक्टर-7 के सरकारी बंगलों को पानी-पानी कर दिया। बीते शुक्रवार को तेज बारिश के बाद 16 सरकारी आवासों (बंगला नंबर 67 से 82 तक) में बरसाती पानी घुस गया।
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इनमें हरियाणा सरकार के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी, पांच मंत्रियों, दो न्यायाधीशों, एडवोकेट जनरल, एडिशनल एडवोकेट जनरल, विपक्ष के नेता, चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और चंडीगढ़ प्रशासन के चीफ इंजीनियर के सरकारी आवास शामिल हैं। कई बंगलों के पीछे और परिसर में पानी भरने से सामान खराब हो गया। घटना के बाद यूटी प्रशासन और नगर निगम में हड़कंप मच गया।
सबसे अधिक प्रभावित बंगला नंबर-79 रहा जहां हरियाणा के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर रहते हैं। इसके साथ बंगला नंबर 80 में वरिष्ठ आईएएस सुमित्रा सिंह, बंगला नंबर 81 में चंडीगढ़ प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा और बंगला नंबर 82 में हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव रहती हैं।
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इन आवासों के पीछे में बरसाती पानी भरने से काफी नुकसान हुआ। सामने की कतार में बने कई अन्य बंगलों में भी पानी घुस गया जहां हरियाणा सरकार के मंत्री, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, न्यायाधीश और विधि अधिकारी रहते हैं।
राजभवन के सामने, फिर भी नहीं बच सके वीवीआईपी बंगले
सेक्टर-7 का यह इलाका शहर के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी आवासीय इलाकों में जाना जाता है। पंजाब राजभवन के ठीक सामने बने ये आठ-आठ कनाल के विशाल बंगले लंबे समय से हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों को आवंटित होते रहे हैं। हालांकि इनका रखरखाव और सड़क, सीवरेज व स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज की जिम्मेदारी चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम की है। ऐसे में पहली ही बारिश में यहां जलभराव ने रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चोक रोड गलियां बनीं वजह
प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया कि बंगलों के आसपास बनी रोड गलियां और उनसे जुड़ी स्टॉर्म वॉटर लाइनें चोक थीं। बारिश का पानी आगे नहीं निकल सका और सड़कों से होता हुआ सरकारी आवासों में घुस गया। हैरानी की बात है कि यहां ऊपर से रोड गलियों की सफाई तो दिखाई देती है लेकिन वर्षों से स्टॉर्म वॉटर पाइपलाइन के भीतर जमी गाद नहीं निकाली गई। नतीजतन निकासी क्षमता लगातार घटती गई।
निरीक्षण के दौरान भी दिखी असहजता
बारिश के बाद जब प्रभावित बंगलों का निरीक्षण किया जा रहा था, तब एक मंत्री के आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने मीडिया से बातचीत से बचने की कोशिश की। जब उनसे जलभराव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और गेट बंद कर दिया।
हड़बड़ी में शुरू कराना पड़ा खोदाई का काम
घटना के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने लगातार दो दिन तक मौके पर रोड गलियों की सफाई करवाई लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद मंगलवार को राजेश खुल्लर, सुमित्रा सिंह और आरती सिंह राव के आवासों के पीछे नई स्टॉर्म वॉटर लाइन डालने के लिए खोदाई शुरू करा दी गई। नगर निगम के संबंधित एक्सईएन मौके पर मौजूद रहकर कार्य की निगरानी करते रहे।
इन वीवीआईपी बंगलों में हुआ जलभराव
प्रभावित आवासों में हरियाणा के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर, वरिष्ठ आईएएस सुमित्रा सिंह, स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव, मंत्री श्रुति सिंह, श्याम सिंह राणा, गौरव गौतम, रणवीर गंगवा, हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, एडवोकेट जनरल प्रविंदर सिंह चौहान, एडिशनल एडवोकेट जनरल मनिंदर सिंह बेदी, चंडीगढ़ प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा, न्यायाधीश निधि गुप्ता और कुलदीप तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के सरकारी आवास शामिल हैं।
निगम के दावों पर उठे सवाल
नगर निगम हर साल दावा करता है कि मानसून से पहले रोड गलियों और ड्रेनेज सिस्टम की व्यापक सफाई कराई जाती है। अधिकारी यह तर्क भी देते रहे हैं कि उत्तरी सेक्टरों की स्टॉर्म वॉटर लाइनें 20 मिमी प्रति घंटा और दक्षिणी सेक्टरों की 25 मिमी प्रति घंटा वर्षा के हिसाब से डिजाइन की गई थीं। अब अधिक बारिश होने से समस्या बढ़ रही है। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक यदि पाइपलाइन की नियमित डी-सिल्टिंग होती रहे तो उसकी वास्तविक क्षमता काफी हद तक बनी रहती है।
चीफ इंजीनियर ने मानी कमी
नगर निगम के चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा ने स्वीकार किया कि सेक्टर-7 के कुछ सरकारी बंगलों में बरसाती पानी घुस गया था। उन्होंने कहा कि रोड गलियां बंद होने के कारण यह स्थिति बनी। सूचना मिलते ही सफाई कराई गई लेकिन समस्या पूरी तरह दूर नहीं हुई। इसके बाद प्रभावित बंगलों के पीछे नई स्टॉर्म वॉटर लाइन डालने का कार्य शुरू कर दिया गया है। एक्सईएन पब्लिक हेल्थ मौके पर रहकर काम की निगरानी कर रहे हैं ताकि आगामी बारिश में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
मौसम विज्ञान विभाग ने चंडीगढ़ के लिए अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। पूरे क्षेत्र में मानसून सक्रिय हो चुका है। पिछले 24 घंटों में चंडीगढ़ में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है । कुछ सीमित स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं भी चली हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, 7, 8, 9 जुलाई और फिर 11 व 12 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी है। 10 जुलाई और 13 जुलाई को भारी बारिश से राहत रहेगी, हालांकि बादल छाए रहेंगे। चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के निवासियों को भीषण गर्मी से राहत मिलने वाली है।
8 जुलाई से 12 जुलाई 2026 तक ट्राईसिटी में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। इस दौरान गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान जो अभी 36 डिग्री सेल्सियस है, वह 12 जुलाई तक गिरकर 33 डिग्री सेल्सियस पर आ जाएगा। न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा।
तापमान के आंकड़े
पिछले 24 घंटों में दोनों राज्यों के तापमान में उतार-चढ़ाव देखा गया है। पंजाब में औसत अधिकतम तापमान में 1.3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है। राज्य में सबसे अधिक तापमान फरीदकोट में 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हरियाणा में औसत अधिकतम तापमान में 0.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, जो सामान्य से 2.1 डिग्री सेल्सियस कम है। राज्य में सबसे ज्यादा तापमान सिरसा में 40.8 डिग्री सेल्सियस रहा। गुरुग्राम और भिवानी में न्यूनतम तापमान सबसे कम यानी 25 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। चंडीगढ़ मुख्य शहर में अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि यहां 9.8 मिलीमीटर बारिश हुई।