चंडीगढ़ सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल हॉल के कैशियर जानकीदास हत्याकांड की जांच अब अंतरराष्ट्रीय टेरर-क्राइम सिंडिकेट तक पहुंच गई है। 13 जून को हुई इस सनसनीखेज वारदात की जांच कर रही चंडीगढ़ पुलिस अब पाकिस्तान से संचालित नेटवर्क, सीमा पार हथियारों की तस्करी और टेरर फंडिंग के एंगल पर फोकस कर रही है।
पुलिस के अनुसार शुरुआती पूछताछ में अमित ने बताया कि जम्मू की अम्फला जेल में उसकी मुलाकात बंद रोहित माक्खन से हुई थी। रोहित ने उसकी बातचीत जर्मनी में छिपे गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों से करवाई। जांच एजेंसियों को संदेह है कि गोल्डी ढिल्लों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (आईएसआई) और वहां शरण लिए बैठे खालिस्तानी-गैंगस्टर नेटवर्क के संपर्क में है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि
चंडीगढ़ में दहशत फैलाने और टेरर फंडिंग के मकसद से इस हत्या के लिए पाकिस्तान से सुपारी और धन उपलब्ध कराया गया था या नहीं।
वारदात में इस्तेमाल तुर्की निर्मित जिगाना पिस्टल अब तक पुलिस के हाथ नहीं लगी है। खुफिया एजेंसियों के इनपुट के अनुसार ऐसे अत्याधुनिक हथियार पाकिस्तान से पंजाब और जम्मू सीमा पर ड्रोन के जरिए भारतीय क्षेत्र में पहुंचाए जाते हैं। शुरुआती पूछताछ में शूटरों ने हथियार सेक्टर-43 के पास फेंकने की बात कहकर पुलिस को गुमराह किया था, लेकिन वहां से कुछ नहीं मिला। अब पुलिस अमित से उस डार्क वेब नेटवर्क और डेड ड्रॉप लोकेशन की जानकारी जुटा रही है, जहां ऐसे हथियार छिपाए जाते हैं।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि चंडीगढ़ और पंजाब में पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़े कुछ स्लीपर सेल सक्रिय हैं। पुलिस अमित से उन फरार आरोपियों के बारे में पूछताछ कर रही है, जिन्होंने वारदात के बाद शूटरों को ठिकाना, लॉजिस्टिक सपोर्ट और हथियार छिपाने में मदद की थी। इन संदिग्धों की भूमिका और नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
18 जून को जम्मू पुलिस ने अमित को गिरफ्तार किया था। उसी दिन चंडीगढ़ पुलिस सन्नी और आर्यन को जम्मू से लेकर आ रही थी। रास्ते में धनास के पास पुलिस वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। आरोप है कि दोनों ने मौके का फायदा उठाकर एएसआई की पिस्टल छीन ली और भागने का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने दोनों के पैरों में गोली मारकर दोबारा गिरफ्तार कर लिया। अब जांच इस पहलू पर भी केंद्रित है कि क्या आरोपियों को फरार होने के निर्देश सीमा पार बैठे उनके आकाओं से मिले थे।