सड़क बनने के बाद तीन वर्ष तक उसकी पूरी मेंटेनेंस उसी ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी। इस अवधि में सड़क पर कहीं भी दरार, गड्ढा या अन्य खराबी आने पर उसकी मरम्मत ठेकेदार अपने खर्च पर करेगा।
चंडीगढ़ की सबसे व्यस्त और लाइफलाइन मानी जाने वाली दक्षिण मार्ग की बदहाल सड़कें अब चकाचक होने जा रही हैं।
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जगह-जगह बने गड्ढों, उखड़ी सतह और हिचकोलों से परेशान लाखों वाहन चालकों को राहत देने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने 14.27 करोड़ रुपये की री-कार्पेटिंग परियोजना शुरू कर दी है। इस परियोजना के तहत जंक्शन-31 (ट्रिब्यून चौक) से मुल्लांपुर बॉर्डर तक मेन रोड, स्लो कैरिज-वे और साइकिल ट्रैक को नए सिरे से तैयार किया जाएगा।
इंजीनियरिंग विभाग की कैपिटल प्रोजेक्ट डिवीजन-2 ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। बरसात थमते ही निर्माण कार्य शुरू होगा। खास बात यह है कि सड़क बनने के बाद तीन वर्ष तक उसकी पूरी मेंटेनेंस उसी ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी।
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इस अवधि में सड़क पर कहीं भी दरार, गड्ढा या अन्य खराबी आने पर उसकी मरम्मत ठेकेदार अपने खर्च पर करेगा। इसके लिए प्रशासन अलग से कोई भुगतान नहीं करेगा। यह मार्ग करीब साढ़े छह वर्ष बाद पूरी तरह री-कार्पेट होगा। वर्तमान में धनास, डड्डूमाजरा, सारंगपुर और मुल्लांपुर की ओर आने-जाने वाले हजारों लोग रोजाना टूटी सड़क के कारण परेशानी झेल रहे हैं। बारिश के बाद हालात और खराब हो गए हैं।
पीएम दौरे से पहले हुआ था सिर्फ पैचवर्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया चंडीगढ़ दौरे से पहले प्रशासन ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरपोर्ट कॉरिडोर के कुछ हिस्सों में केवल पैचवर्क कराया था। जंक्शन-47 से आगे मुल्लांपुर की ओर जाने वाले हिस्से में स्थायी मरम्मत नहीं हुई थी। अब पहली बार पूरे कॉरिडोर की री-कार्पेटिंग कर सड़क को स्थायी रूप से दुरुस्त किया जाएगा।
रोज गुजरते हैं डेढ़ लाख वाहन
दक्षिण मार्ग शहर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक कॉरिडोर में शामिल है। प्रशासन की ट्रैफिक स्टडी के अनुसार ट्रिब्यून चौक (जंक्शन-31) से पीक आवर में 9,800 से 10,000 पीसीयू गुजरते हैं जबकि पूरे कॉरिडोर से प्रतिदिन करीब 1.35 से 1.50 लाख वाहन आवाजाही करते हैं। सड़क की खराब हालत का सीधा असर हजारों नहीं, बल्कि लाखों यात्रियों पर पड़ रहा है।
पहले सर्वे, फिर लेवलिंग, उसके बाद री-कार्पेटिंग
निर्माण एजेंसी सबसे पहले इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के साथ पूरे मार्ग का निरीक्षण करेगी। जहां-जहां सड़क धंसी हुई है या बड़े गड्ढे हैं, वहां पहले भराई और लेवलिंग होगी। इसके बाद ही री-कार्पेटिंग शुरू की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया टेंडर की शर्तों में शामिल की गई है, ताकि नई सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहे।
नगर निगम से अलग मॉडल
प्रशासन का यह मॉडल नगर निगम से अलग है। निगम की सड़कों में निर्माण के बाद ठेकेदार की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है, जबकि प्रशासन तीन वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी उसी एजेंसी पर तय करता है। शहर में नगर निगम की कई सड़कें ऐसी हैं, जिनकी री-कार्पेटिंग के तीन वर्ष भी पूरे नहीं हुए, लेकिन उन पर दो-दो बार पैचवर्क करना पड़ा है।
जंक्शन-31 से मुल्लांपुर बॉर्डर तक मेन रोड, स्लो कैरिज-वे और साइकिल ट्रैक की 14.27 करोड़ रुपये से री-कार्पेटिंग कराई जाएगी। निर्माण के बाद तीन वर्ष तक सड़क का रखरखाव भी संबंधित ठेकेदार ही करेगा। -सी.बी. ओझा, चीफ इंजीनियर, चंडीगढ़ प्रशासन