पंजाब में 78 प्रतिशत लोग दूध की बिक्री के लिए पशु पालन में लगे हुए हैं जो देश भर में सबसे अधिक है जबकि घरेलू खपत के लिए सिर्फ 15% लोग ही पशुओं को पाल रहे हैं। इससे साफ है कि अब घरेलू खपत के लिए पशु पालन का चलन खत्म होता जा रहा है और प्रदेश में यह सिर्फ अब व्यवसाय बनकर रह गया है।
रिपोर्ट की अनुसार दूध की बिक्री अधिक होने के कारण पंजाब उन राज्यों में शामिल हैं जहां लोग पांच से अधिक पशु रखते हैं। इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी लोग अधिक पशु रखते हैं। पंजाब में 27% लोगों ने माना है कि पशुओं को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है जबकि 20% लोगों का मानना है कि पशु शेड के लिए निर्माण की उच्च लागत और धन भी पर्याप्त नहीं है। 18% लोगों को शेड का डिजाइन कैसा होना चाहिए इस बारे में जानकारी नहीं है। ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में स्थिति अधिक खराब है। ओडिशा में 45% लोगों का कहना है कि पशुओं को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है जबकि जारखंड में यह 35% लोगों ने पर्याप्त जगह न होने की बात कही है।
रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में सबसे अधिक 58% लोगों का मानना है कि उनके एरिया के आसपास पशु चिकित्सा सेवाओं का अभाव है। इसी तरह 38% लोगों ने पशु चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता सही न होने की बात कही है। इसके अलावा 27% लोगों का कहना है कि उपचार और दवाओं की लागत अधिक है। प्रदेश के 36% लोगों के अनुसार उनके यहां बार-बार गंभीर बीमारी की घटनाएं होती हैं। वहीं पंजाब में हरे चारे की उपलब्धता अधिक है जिस कारण लोगों को चारे की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है जबकि कई राज्य में इसकी समस्या है।