पंजाब के छह जिलों में कैंसर डे केयर सेंटर स्थापित किए जाएंगे। कैंसर से बुरी तरह प्रभावित मालवा बेल्ट में सबसे अधिक सेंटर बनाए जाएंगे ताकि मरीजों की समय पर स्क्रीनिंग हो सके। साथ ही इससे कीमोथेरेपी और प्राथमिक इलाज में भी मदद मिलेगी।
पहले चरण में केंद्र सरकार ने लुधियाना, पटियाला, संगरूर, जालंधर, अमृतसर व होशियारपुर में ये सेंटर स्थापित करने का फैसला लिया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय व राज्य सरकार की तरफ से तैयार रिपोर्ट के अनुसार जिन जिलों में कैंसर के अधिक मरीज आ रहे हैं, पहले उनमें सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसी तरह मालवा बेल्ट में और सेंटर बनाने की मंजूरी का प्रस्ताव भी राज्य सरकार की तरफ से केंद्र को भेजा जाएगा।
चिंताजनक बात यह है कि प्रदेश में कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले पांच साल के अंदर ही कैंसर के मामलों में 9.46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। राज्य में कैंसर की स्क्रीनिंग सबसे बड़ी समस्या है। समय पर कैंसर का पता न चलने के कारण कैंसर से मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी हो रही है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष आम बजट में सभी जिलों में कैंसर डे केयर सेंटर खोलने की घोषणा की थी। वर्ष 2025-26 में सभी राज्यों में 200 केंद्र स्थापित करने की योजना है। कैंसर से लड़ाई में पंजाब के लिए यह परियोजना बड़ी अहम है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने पहले सभी जिलों में यह केंद्र खोलने का प्रस्ताव भेजा था। केंद्र की राष्ट्रीय कार्यक्रम समन्वय समिति ने इसकी हरी झंडी दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने कैंसर रजिस्ट्री डेटा का उपयोग करते हुए एक राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर के मरीज व स्वास्थ्य सुविधाओं में गैप को लेकर एक सर्वे किया था जिसके बाद ही इन सेंटरों को स्थापना की योजना बनाई थी।
पंजाब में घातक रूप धारण करता जा रहा कैंसर
पिछले कुछ समय से सूबे में कैंसर घातक रूप धारण करता जा रहा है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 के दौरान राज्य में कैंसर के 38,636 मामले सामने आए थे जो वर्ष 2024 में बढ़कर 42,288 हो गए हैं। पिछले 10 वर्षों में ब्रेस्ट कैंसर की 25.8 व सर्वाइकल कैंसर की मृत्यु दर में 26.26 फीसदी बढ़ोतरी हुई है जिसने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2014 में ब्रेस्ट कैंसर से 1972 महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। वर्ष 2023 में मौतों की संख्या बढ़कर 2480 हो गई। इसी तरह सर्वाइकल कैंसर से वर्ष 2014 में 857 महिलाओं की मौत हुई जबकि वर्ष 2023 में मौतों की संख्या बढ़कर 1082 हो गई। दूषित पानी व खाद्य पदार्थों में भारी मिलावट। भूजल में भारी धातुओं की मौजूदगी, फसलों में हानिकारक कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग, खराब जीवनशैली, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और जागरूकता की कमी कैंसर के प्रमुख कारण हैं।