पंजाब में कैंसर जानलेवा होता जा रहा है। रोजाना 68 लोगों की जान ले रहा है। सूबे पहले से 9.22 फीसदी मृत्यु दर बढ़ गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
पंजाब में कैंसर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और यह रोजाना 68 लोगों की जान ले रहा है। सूबे में पांच साल के अंदर ही मृत्यु दर में 9.22 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। मालवा बेल्ट कैंसर से सबसे ज्यादा प्रभावित है। यही कारण है कि सूबा सरकार ने हाल ही में कैंसर को अधिसूचित रोग भी घोषित किया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
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रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में हर साल कैंसर के मरीजों में बढ़ोतरी होती जा रही है। वर्ष 2021 के दौरान कैंसर के 39521 मामले सामने आए थे जो वर्ष 2022 में बढ़कर 40435 तक पहुंच गए। इसी तरह वर्ष 2023 में भी मरीजों में वृद्धि जारी रही और कैंसर के 41337 मामले सामने आए।
इसी तरह वर्ष 2024 के दौरान 42288 और वर्ष 2025 में कैंसर के 43196 मामले दर्ज किए गए हैं। यही कारण है कि सरकार ने कैंसर को अधिसूचित रोग घोषित करके अब सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए कैंसर के हर मामले और मृत्यु की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देनी अनिवार्य कर दी है जिसके आधार पर कैंसर के प्रभावी इलाज और रोकथाम के लिए नीति तैयार करने के साथ ही योजनाएं लागू की जाएगी।
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वर्ष 2025 में 24886 लोगों की ली जान
रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ समय से मृत्यु दर में बढ़ोतरी होती जा रही है। वर्ष 2021 के दौरान कैंसर से 22786 लोगों की जान गई थी और वर्ष 2025 में मौतें बढ़कर 24886 तक पहुंच गई। इसी तरह वर्ष 2022 में जहां 23301 और वर्ष 2023 में 23818 लोगों की मौत हो गई। इसी तरह वर्ष 2024 के दौरान 24369 लोगों को कैंसर से अपनी जान गंवानी पड़ी।
हरियाणा में भी बढ़ रहे कैंसर के मामले
हरियाणा में भी पिछले कुछ समय से कैंसर के मामले में बढ़ोतरी होती जा रही है। हालांकि अभी भी राज्य में पंजाब के मामले कैंसर के मामले कम है। हरियाणा में वर्ष 2021 के दौरान कैंसर के 30015 मामले सामने आए थे जो वर्ष 2025 में बढ़कर 33395 तक पहुंच गए। इसी तरह मौतें भी वर्ष 2021 में 16543 से बढ़कर 18387 तक पहुंच गई है।
भूजल में यूरेनियम की अधिक मात्रा भी कैंसर का बड़ा कारण
प्रदेश में दूषित भूजल के कारण कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। सूबे के कई शहर भूजल में यूरेनियम की अधिक मात्रा से प्रभावित हैं जो बीमारियों को न्योता दे रहा है। यूरेनियम जैसे तत्वों की मौजूदगी लंबे समय तक गुर्दे, यकृत और हड्डियों में जाकर गंभीर स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा कर सकती है। इसे कैंसर का भी प्रमुख कारण माना जाता है और मालवा बेल्ट में यह समस्या अधिक है। यही कारण है कि संसदीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में इसे लेकर चिंता जताई थी।
समय पर जांच जरूरी
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के माध्यम से पात्र मरीजों को कैंसर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि उन्हें उपचार के खर्च की चिंता न करनी पड़े। उन्होंने कहा कि लोग बिना किसी कारण वजन कम होने, असामान्य रक्तस्त्राव, लंबे समय तक रहने वाली खांसी या मल-मूत्र की सामान्य प्रक्रिया में होने वाले बदलाव जैसे चेतावनी संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें और समय रहते चिकित्सकीय जांच कराएं।