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Punjab By Election: पंजाब में सियासी भविष्य तलाश रही भाजपा की राह कांटों भरी, दिग्गजों के सहारे चुनावी डोर

Fri, 15 Nov 2024 09:01 AM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

भाजपा ने गिद्दड़बाहा से पांच बार के विधायक मनप्रीत बादल और बरनाला से कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी केवल सिंह ढिल्लों को टिकट देकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इसी तरह डेरा बाबा नानक से अकाली नेता निर्मल सिंह काहलों के बेटे रविकरण काहलों और चब्बेवाल से सोहन सिंह ठंडल पर दांव खेला है।
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भाजपा - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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पंजाब में चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए 20 नवंबर को मतदान होना है, जिसके चलते सभी चार सीटों पर राजनीतिक दलों की तरफ से जोर शोर के साथ प्रचार किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी भी इस चुनाव के जरिये पंजाब में अपना सियासी भविष्य तलाश रही है, जिसके लिए पार्टी ने चुनाव की डोर दिग्गजों के हाथ में सौंप दी है।

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केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत बिट्टू प्रचार के लिए खुद मैदान में उतरे हुए हैं। इसी तरह पार्टी ने सभी सीटों पर दिग्गज नेताओं को चुनाव मैदान में भी उतारा है, ताकि ये पार्टी की साख बचाने में कामयाब हो सकें। इस सबके बावजूद पार्टी की राह आसान नहीं लग रही है। पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए अच्छा नहीं रहा है। सहयोगी शिरोमणि अकाली दल से भी भाजपा नाता तोड़ चुकी है।

प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ ने किया किनारा

भाजपा ने पार्टी को संभालने के लिए सुनील जाखड़ के हाथों में पार्टी की कमान सौंपी थी, जो भाजपा में कांग्रेस छोड़कर आए थे। जाखड़ ने खुद अब पार्टी की गतिविधियों से किनारा किया हुआ है। साथ ही वह उपचुनाव के प्रचार से भी गायब हैं। पिछले कुछ समय से वह सोशल मीडिया पर सक्रिय जरूर हुए हैं, लेकिन पहले की तरह पार्टी गतिविधियों में सार्वजनिक रूप से शामिल नहीं हो रहे हैं। हाईकमान के साथ ही पार्टी के स्थानीय नेतृत्व की भी इस कारण चिंता बढ़ गई है। पिछले नतीजे भी पार्टी के लिए पंजाब में कुछ खास अच्छे नहीं रहे थे, जिससे अभी तक पार्टी उबर नहीं पाई है।

किसान आंदोलन से भी बढ़ी चिंता

इसके अलावा किसान आंदोलन के कारण पार्टी की छवि को पहले ही काफी नुकसान हुआ है और इस मुद्दे पर पार्टी लीडरशिप भी दो धड़ों में खड़ी हुई दिखाई दे रही है। भाजपा ने दूसरे दलों से आए नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी की हालत सुधारने का प्रयास किया है। लुधियाना लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद रवनीत बिट्टू को केंद्रीय राज्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी पार्टी में शामिल करवाया गया।

कांग्रेस के गढ़ में कमल खिलाने की चुनौती  

मनप्रीत बादल दो बार मंत्री रह चुके हैं। उनके नाम 9 बार प्रदेश का बजट पेश करने का रिकाॅर्ड है। जनवरी 2023 में वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। अब कांग्रेस के गढ़ में ही कमल खिलाने की उनके सामने चुनौती है। गिद्दड़बाहा में पिछले तीन चुनाव से अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग जीत दर्ज करने आए हैं। अब इस सीट से उनकी पत्नी अमृत वड़िंग चुनाव मैदान में हैं। पिछला चुनाव मनप्रीत बादल के लिए अच्छा नहीं रहा है। वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव उन्होंने बठिंडा अर्बन सीट से लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इसी तरह केवल ढिल्लों दो बार बरनाला से विधायक रह चुके हैं, लेकिन 2017 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर वह हार गए थे।

इसी तरह संगरूर लोकसभा सीट पर 2019 व 2022 उपचुनाव में भी उनको हार का सामना करना पड़ा था। इसी तरह भाजपा ने सोहन सिंह ठंडल को चब्बेवाल सीट की जिम्मेदारी सौंपी है। पिछला लोकसभा चुनाव उन्होंने शिअद से होशियारपुर सीट से लड़ा था, लेकिन उनको भी हार देखनी पड़ी थी। इसी तरह पिछले विधानसभा में भाजपा को दो सीटों से संतुष्टि करनी पड़ी थी और लोकसभा चुनाव में भी उसके हाथ खाली रहे थे। भाजपा इन पिछले नतीजों को पलटने के लिए ही चुनाव मैदान में उतरी है।

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