हुसैनीवाला बार्डर से सटे एक-एक गांव में तकरीबन 18 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे गांव में प्रवेश रास्तों, चौराहों व सड़कों पर लगाए हैं। ताकि सीमावर्ती गांवों में प्रवेश होते बाहरी वाहनों व लोगों की गतिविधियां बीएसएफ देख सके।
बीएसएफ सीमावर्ती गांवों में तीसरी आंख से पैनी नजर रखेगी। हुसैनीवाला बार्डर व ममदोट से सटे सीमावर्ती गांवों सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं। इससे सरहद पार से हेरोइन व असलहा तस्करी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। इसी तरह पंजाब से सटी तकरीबन साढ़े पांच सौ किलोमीटर लंबी भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे गांवों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।
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हुसैनीवाला बार्डर से सटे एक-एक गांव में तकरीबन 18 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे गांव में प्रवेश रास्तों, चौराहों व सड़कों पर लगाए हैं। ताकि सीमावर्ती गांवों में प्रवेश होते बाहरी वाहनों व लोगों की गतिविधियां बीएसएफ देख सके। क्योंकि पाकिस्तान की तरफ से तस्कर ड्रोन के माध्यम हेरोइन व असलहा भारतीय तस्करों को भेज रहे हैं।
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ड्रोन से भेजी गई खेप उठाने वालों की कैमरों के माध्यम धरपकड़ आसान हो जाएगी। बीएसएफ का क्षेत्र एरिया अब पचास किलोमीटर के दायरे में है। बीएसएफ और पंजाब पुलिस मिलकर तस्करों की धरपकड़ कर रही है। कई जगहों पर पंजाब सरकार ने भी सरहदी इलाकों में सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं।
ग्रामीण गुरदेव सिंह बताते हैं कि उनके सरहदी गांव भाने वाला में लगभग 18 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जबकि हुसैनीवाला बार्डर से लगभग पंद्रह गांव (बारह के करीब पंचायत है) सटे हैं, ये गांव सतलुज दरिया पार हैं। यहां पर अब पाकिस्तानी तस्कर दिन में भी ड्रोन भेज हेरोइन व असलहा की खेप भेज रहे हैं। इसी तरह ममदोट ब्लॉक के प्रवेश रास्तों के अलावा सरहद से सटे गांवों के प्रत्येक सड़क व चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं।
ग्रामीण खंडा सिंह व जसविंदर सिंह ने बताया कि ममदोट क्षेत्र में सबसे ज्यादा पाकिस्तान की तरफ से हेरोइन व असलहा तस्करी होता है। यहां कुछेक ऐसे इलाके हैं, जहां भारत-पाकिस्तान के गांव आमने-सामने हैं। ऐसे एरिया में तस्करी की वारदातें बहुत होती है, यहां भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।