भारतीय किसान यूनियन का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने मृतक सनमदीप सिंह के शव का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव कनोई में कराने के बजाय संगरूर के उभावाल रोड पर जबरन करवा दिया।
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने सरकार और संगरूर पुलिस के कथित तानाशाही रवैये के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सरकार के पुतले जलाए गए। सुखपाल माणक कनकवाल की अगुवाई में एकत्रित हुए किसान कार्यकर्ताओं ने पंजाब पुलिस और राज्य सरकार का पुतला जलाकर अपना आक्रोश जताया।
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किसान नेताओं ने संगरूर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हाल ही में गांव कनोई के युवक सनमदीप सिंह ने मानसिक परेशानी के चलते आत्महत्या कर ली थी। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा था, लेकिन पुलिस ने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय परिजनों को ही थाने में बैठा लिया।
इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मृतक सनमदीप सिंह के शव का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव कनोई में कराने के बजाय संगरूर के उभावाल रोड पर जबरन करवा दिया। विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए किसान नेता सुखपाल माणक कनकवाल और जीत सिंह गंडूआं ने तीखे लहजे में कहा कि यह पंजाब के इतिहास में शायद पहली बार हुआ है जब किसी नागरिक को अंतिम संस्कार के लिए अपने ही गांव में दो गज जमीन तक नसीब नहीं होने दी गई।
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किसान नेताओं ने कहा पुलिस की यह कार्रवाई अमानवीय, अतिशयता और सरासर प्रशासनिक तानाशाही का प्रमाण है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान इकाई गंडूआं और इकाई भैणी के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में स्थानीय किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे।