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Fauja Singh: जिस सैर ने बेहतर बनाई थी जिंदगी, उसी ने छीन ली...114 साल की उम्र में भी आंखों में चश्मा नहीं लगा

Wed, 16 Jul 2025 09:27 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)

सार

दिग्गज मैराथन धावक फौजा सिंह को सैर के दाैरान एक कार ने टक्कर मार दी थी। उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। 
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फाैजा सिंह की माैत से गांव में मातम - फोटो : संवाद
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विस्तार
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114 वर्षीय एथलीट फौजा सिंह की सड़क हादसे में मौत के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर है। जिस सैर ने उनकी जिंदगी बेहतर बनाई थी, उसी ने जिंदगी छीन भी ली। 
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उनके बेटे हरविंदर सिंह ने बताया कि हादसा घर से महज 300 मीटर की दूरी पर जालंधर पठानकोट नेशनल हाईवे पर हुआ। उनके पिता दोपहर 3 बजकर 5 मिनट पर घर से निकले थे, बाहर गली में 3:07 पर जाते दिखाई दिए और 3:10 पर गाड़ी ने टक्कर मार दी।

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फौजा सिंह घर से ढाबा और खेतों को देखने के लिए निकले थे। अब उनके संस्कार बेटे बेटियों के विदेश से आने के बाद किया जाएगा। जो शुक्रवार या शनिवार तक किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को मोर्चरी में रखवाया गया है। 
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खाने के बाद कभी नहीं किया आराम

हरविंदर सिंह ने कहा कि पिता को सैर करना पसंद था। एक एथलीट की जिंदगी ऐसी ही होती है। फौजा सिंह काफी जुझारू थे, उन्होंने खाने के बाद कभी आराम नहीं किया।

अपने ढाबे तक सैर करने गए थे फाैजा सिंह

गांव के नरेंद्र सिंह ने बताया कि पूरे गांव में उनकी मौत के बाद से शोक की लहर है क्योंकि वह एक बहुत ही मिलनसार व्यक्ति थे। हादसे वाली जगह पर खून के धब्बे अभी भी बने हुए हैं। हादसे के बाद फौजा सिंह को अस्पताल ले जाने वाले गुरप्रीत सिंह ने कहा कि फौजा सिंह अक्सर गांव से सैर करने निकला करते थे। घटनास्थल से कुछ दूरी पर फौजा सिंह की जमीन है, जहां एक ढाबा लीज पर दिया है। वह अक्सर उक्त ढाबे तक सैर करने के लिए आया करते थे। वह अपने साथियों के साथ तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन रात के वक्त फौजा सिंह में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

1993 में पत्नी की माैत

1993 में पत्नी के बिछड़ने के बाद वह थोड़े निराश हुए थे पर जिंदगी से जंग लगातार जारी थी। फौजा सिंह के तीन बेटे और तीन बेटियां थी जिसमें बड़ी बेटी और बड़े बेटे का निधन हो गया। बड़ा बेटा जिसका नाम कुलदीप सिंह है और उसके नाम पर मुख्य हाईवे पर ढाबा भी खोला था, उसकी मौत हो गई। उसके बाद बड़ी बेटी गुरबख्श कौर जो कनाडा में रहती थी, उसका भी निधन हो गया। गुरबख्श कौर सबसे बड़ी थीं। दूसरी बेटी जसविंदर कौर इंग्लैंड में हैं। छोटी बेटी निर्मल कौर कनाडा में, बेटा सुखजिंदर सिंह इंग्लैंड में हैं, जिसके दो बच्चे हैं। हरविंदर सिंह अपने परिवार के साथ गांव ब्यास पिंड में पिता के साथ रहता था।
 
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