राज्यसभा सांसद छोड़ चुके साथ
2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में सक्रिय रहे राज्यसभा सांसद भाजपा में चले गए हैं। इनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। साल 2022 के चुनाव में राघव चड्ढा आप के प्रमुख रणनीतिक चेहरों में रहे हैं जबकि संदीप पाठक संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े रहे।
पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का युवाओं में प्रभाव है। अशोक मित्तल शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं। विक्रमजीत साहनी उद्योग, समाजसेवा और पंजाबी प्रवासी समुदाय में पहचान रखते हैं। इसी तरह राजिंदर गुप्ता उद्योगपतियों में अच्छा रसूख रखते हैं। चुनाव से पहले सांसदों के दल-बदल से विधानसभा चुनाव में आप को नुकसान हो सकता है।
2014 में एंट्री और 2022 में सत्ता
पंजाब की सियासत में आम आदमी पार्टी का निर्णायक उदय 2014 के लोकसभा चुनाव से माना जाता है। पार्टी ने 13 में से चार सीटें फतेहगढ़ साहिब, फरीदकोट, संगरूर और पटियाला जीती थीं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में आप ने 20 सीटें जीतकर कांग्रेस के बाद मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया। हालांकि 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी तीन सीटों तक सिमट गई लेकिन 2022 में उसने जोरदार वापसी की। भगवंत मान के नेतृत्व में आप ने 117 में से 92 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत के साथ सरकार बनाई।
पार्टी के लिए जीत क्यों जरूरी
पंजाब में दोबारा जीत पार्टी के लिए बहुत जरूरी है। इसी के चलते पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल भी सूबे में सत्ता वापसी के भरसक प्रयासों में जुटे हैं। साल 2022 में जब आप ने पंजाब में सरकार बनाई थी तो दिल्ली में भी आप की सरकार थी। दिल्ली माॅडल के बूते ही पंजाब में सत्ता की राह आसान की गई मगर अब हालात विपरीत हैं। आप दिल्ली खो चुकी है और अब पंजाब को हाथ से फिसलने नहीं देना चाहती। लिहाजा दोबारा जीत के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी है।