पुलिस ने कई युवकों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इनमें से एक युवक के नाबालिग होने की बात सामने आई है। पुलिस इनसे भी हिंसा और तोड़फोड़ में उनकी भूमिका को लेकर पूछताछ कर रही है। लुधियाना के एक विद्यार्थी को एलपीयू प्रबंधन ने आरोपी बताया था। पुलिस जांच में सामने आया कि बवाल के समय वह अपने घर पर था। उसके घर के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल टावर लोकेशन से इसकी पुष्टि हुई है। पुलिस फिलहाल उसे जांच के दायरे में रखकर उसकी भूमिका की पड़ताल कर रही है। पुलिस को कुछ लड़कियों के फोटो भी मिले हैं, जो लूटपाट का सामान लेकर जाती दिखाई दे रही हैं। उनकी पहचान और भूमिका की भी जांच की जा रही है।
26 सितंबर की रात एलपीयू हॉस्टल में छात्रा से दुष्कर्म की सूचना सोशल मीडिया पर फैली थी। यह सूचना फैलने के बाद ही कैंपस में बवाल शुरू हुआ था। इसके बाद कैंपस में तोड़फोड़ और यूनि मॉल की दुकानों में लूटपाट हुई। प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-फगवाड़ा मार्ग पर एनएच-44 को जाम कर दिया था। यह जाम 18 घंटे से अधिक समय तक लगा रहा। गिरफ्तार गगन के मामा ने पुलिस पर जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया। परिजनों के अनुसार गगन एक दिन से लापता था और उसने पेशी से पहले फोन पर गिरफ्तारी की जानकारी दी। परिवार के मुताबिक वह करीब डेढ़ महीने पहले ही डोमिनोज में नौकरी पर लगा था।
पंजाब में लग रहा डर: कुलपति अशोक मित्तल
एलपीयू के चांसलर और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने हिंसा पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें पंजाब में डर लग रहा है। उन्होंने पंजाब में नशाखोरी, गैंगस्टरवाद, छीना-झपटी और अपहरण जैसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। मित्तल के अनुसार चितकारा यूनिवर्सिटी और एलपीयू में हुई हिंसा का स्वरूप एक जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेडिट के जरिये अफवाहें फैलाकर विद्यार्थियों को भड़काया गया। कुछ बाहरी तत्वों ने मौके का फायदा उठाकर एलपीयू में तोड़फोड़ और चोरी की। मित्तल ने इसे पंजाब को अस्थिर करने की साजिश बताया और मामले की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों को सामने लाया जाना चाहिए।