गौरतलब है कि सामान्य प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी केंद्रीय या राज्य एजेंसी द्वारा किसी क्षेत्र में छापेमारी की जाती है तो संबंधित स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी जाती है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाई रखी जा सके। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी खन्ना में कुछ लोग खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर एक व्यापारी के घर में घुस गए थे। बाद में मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच के बाद माफी मांगी गई थी।
ऐसे में इस बार भी यह सवाल उठ रहा है कि छापेमारी वास्तव में किसी अधिकृत एजेंसी ने की या नहीं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल 30 करोड़ रुपये की बरामदगी, व्यापारी के फरार होने और कार्रवाई करने वाली एजेंसी की पहचान को लेकर प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आधिकारिक बयान आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस बारे में डीएसपी मोहित सिंगला से बात की तो उन्होंने स्पष्ट किया कि जीएसटी विभाग की रेड हुई है। क्या-क्या बरामद हुआ है या क्या कार्रवाई की है वह जीएसटी विभाग ही बता सकता है।