पाकिस्तान की हिरासत में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जवान पीके शाह को छह दिन से भी ज्यादा समय बीत चुका है। बीएसएफ अधिकारी अपने जवान की रिहाई के लिए झंडा लगाकर फ्लैग मीटिंग के लिए छठे दिन भी पाक रेंजर्स का इंतजार करते रहे, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कोई नहीं आया। जानकारों का कहना है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद उक्त जवान की रिहाई दोनों देशों की राजनीति का मुद्दा बन गया है।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक बीएसएफ जवान पीके शाह इंट्रिंसिक सेफ्टी (आंतरिक सुरक्षा) के चलते जम्मू-कश्मीर से पंजाब के जिला फिरोजपुर आया था। उक्त जवान की बटालियन जम्मू-कश्मीर में है। ये ब्लॉक ममदोट स्थित बीएसएफ की पोस्ट जल्लोके के पास फेंसिंग पार किसानों की देखरेख के लिए गया था, वहां गलती से करीब चार फीट अंदर पाकिस्तान की हद में चला गया। यह पाकिस्तान का वह क्षेत्र है जहां जासूसी करने को कुछ भी नहीं है, जवान सिर्फ गर्मी से बचने के लिए शीशम के पेड़ की छाया तले बैठा था।
पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों में तनाव पैदा होने के चलते जबरदस्ती पाक रेंजर्स उसे पकड़कर ले गए। सीमावर्ती ग्रामीण बताते हैं कि रूटीन में यह आम बात है। मंगलवार को भी बीएसएफ अपना झंडा लगाकर फ्लैग मीटिंग के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स का इंतजार करती रही। पाक रेंजर्स भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं जैसे आदेश आए बीएसएफ से मीटिंग कर जवान की रिहाई की जा सके। ऐसा माना जा रहा है कि अब उक्त जवान की रिहाई का मामला बीएसएफ और पाक रेंजर्स के हाथ में नहीं रह गया, यह दोनों देशों की राजनीति का मुद्दा बन गया है। यह स्थिति पहलगाम हमले को लेकर पैदा हुई है। चर्चा थी कि अपने पति पीके शाह की रिहाई के लिए रजनी फिरोजपुर पहुंचेगी लेकिन वह आई नहीं।