ग्रामीण विकास मंत्री सिकंदर सिंह मलूका पर हमले की कोशिश के आरोप में काबू किया जरनैल सिंह मंगलवार शाम जेल से जमानत पर रिहा हो गया।
जेल से बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत में जरनैल सिंह ने कहा कि उसने तो मलूका को प्रदेश में हो रही श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले के बारे में बात की थी।
वहीं वहां खड़े कुछ अकाली समर्थकों ने उस पर मलूका पर हमला करने की कोशिश का आरोप लगाकर पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उसे गंभीर हालत में पहले गाड़ी में डालकर इधर-उधर घुमाया।
बाद में उसे फरीदकोट के मेडिकल अस्पताल में दाखिल करवा दिया। जरनैल सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने जबरदस्ती फरीदकोट अस्पताल से छुट्टी दिलवाकर उसे जेल भेज दिया था, जबकि वह पूरी तरह से ठीक नहीं था।
उसने कहा अकाली मंत्री की शह पर पुलिस ने उसके खिलाफ झूठा केस दर्ज कर जेल भेज दिया था। जरनैल सिंह को जेल से लेने आए गांव निवासियों ने अकाली सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
उन्होंने कहा कि अकाली नेता उनके क्षेत्र में दहशत फैलाना चाहता है। उन्होंने कहा कि वह ऐसा कभी भी नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में जितनी भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं हुई हैं।
उसके लिए अकाली सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है। उधर, इस मामले के बारे में जब अकाली मंत्री सिकंदर सिंह मलूका से संपर्क कर उनका पक्ष जानना चाहा तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
जिले के गांव हमीरगढ़ में 20 नवंबर को अकाली मंत्री सिकंदर सिंह मलूका समर्थकों के साथ बैठक करने पहुंचे थे। इस दौरान वहां पर जरनैल सिंह ने मलूका पर हमला करने की कोशिश की थी।
इसमें अकाली मंत्री सिकंदर सिंह मलूका की पगड़ी उतर गई थी। एसएसपी स्वप्न शर्मा ने कहा था कि बैठक में पहुंचे लोगों की ज्यादा भीड़ होने से अकाली मंत्री मलूका की पगड़ी पीछे से किसी का धक्का लगने से उतर गई थी।