भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के इस्तीफे के बाद भाजपा और एनडीए में हड़कंप की स्थिति है। गोवा सम्मेलन के तुरंत बाद इस झटके से उबरने के लिए भाजपा अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगी दल शिरोमणि अकाली दल की शरण में पहुंच गई है।
पार्टी हाईकमान ने शिअद के वरिष्ठ नेता व पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को आडवाणी को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
आडवाणी के इस्तीफे के तुरंत बाद पार्टी ने उन्हें मनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा का मानना है कि इस इस्तीफे के बाद जनता में गलत संकेत जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस्तीफा मिलने के तुरंत बाद पार्टी के अलावा सहयोगी दलों के ऐसे नेताओं की तलाश शुरू की जिनके आडवाणी से आत्मीय संबंध हैं। इसी दौरान पार्टी के नेताओं ने राजनाथ को बादल का नाम सुझाया।
इसके बाद भाजपा नेताओं ने बादल से संपर्क करने की कोशिश की, जो आजकल मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल के दौरे पर हैं।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री बादल से बातचीत कर उन्हें आडवाणी को मनाने का जिम्मा सौंपा है।
एनडीए के सहयोगी दलों में शिअद के कद्दावर नेता बादल ही भाजपा के शिल्पकार आडवाणी के समकक्ष हैं। बादल और आडवाणी के बीच बेहद आत्मीय संबंध रहे हैं।
पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन के बीच जब कभी भी कोई मनमुटाव या विवाद पैदा हुआ तो मुख्यमंत्री बादल ने फौरन अपने भरोसेमंद और कद्दावर नेता आडवाणी से संपर्क साधा है।
इन्हीं सब बातों का ध्यान रखते हुए भाजपा हाईकमान ने बादल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उधर, शिअद प्रधान सुखबीर बादल ने आडवाणी के इस्तीफे को भाजपा का अंदरूनी मामला बताया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या कुछ सहयोगी दल अब एनडीए में रहने या न रहने के लिए मंथन कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर कोर कमेटी में ही फैसला होता है।