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पौने दो सौ वर्ष पहले सिख जरनैल व सैनिकों की हुई हत्या का पश्चाताप करेगी एसजीपीसी

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शेरे-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह की मौत के बाद तत्कालीन डोगरा शासक राजा हीरा सिंह डोगरा के बहकावे में आकर कुछ सिख सैनिकों ने जरनैल बाबा बीर सिंह नोरंगाबादी व अन्य सिख सैनिकों की हत्या कर दी थी। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इस घटना के लगभग पौने दो वर्षों के बाद पश्चाताप करने का फैसला किया है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल को निर्देश दिए कि वह 10 अक्टूबर को इस घटना का पश्चाताप करने के लिए दुनिया भर की सिख संस्थाओं व सभा सोसाइटियों को न्योता भेजकर श्री अकाल तख्त साहिब में पहुंचने के लिया आग्रह करें। इस संदर्भ में सभी सिख संस्थाओं व सभा सोसाइटियों को पत्र लिखा जाए, ताकि वह दस अक्टूबर को श्री अकाल तख्त साहिब में पहुंच सकें। जत्थेदार के अनुसार यह घटना बहुत ही दुखदायी थी। इसके बारे में देश-विदेश में बैठी सिख संगत ने उन्हें पत्र लिख कर जानकारी दी है। सिखों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अरदास कार्यक्रम रखा गया है।
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