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दामाद पर दर्ज करवाया नाबालिग बेटी से शादी करने पर दुष्कर्म का केस, कोट ने किया बरी

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अमृतसर। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंधीर वर्मा की अदालत ने नाबालिग को अगवा कर दुष्कर्म करने के मामले में आरोप साबित न होने पर युवक को बरी कर दिया। वकील नमित सिंह मेहता ने बताया कि गवाही के दौरान पीड़िता अपने नाबालिग होने की जन्म तारीख के प्रमाण नहीं दे पाई। केस दर्ज करते समय लड़की के नाबालिग होने के सबूत के तौर आधार कार्ड दिखाया था, लेकिन तीन साल जेल में बिताने के बाद अदालत ने उनके क्लाइंट को रिहा कर दिया और अब पीड़ित युवक ने अपनी पत्नी को पाने के लिए केस दायर कर दिया है।
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कंबो थाना पुलिस ने 5 अक्टूबर 2019 को मजीठा रोड स्थित गंडा सिंह निवासी जरनैल सिंह पर नाबालिग को अगवा कर दुष्कर्म करने और पॉस्को एक्ट में केस दर्ज किया था। इससे पहले पीड़ित का युवती के साथ दो साल तक प्रेम प्रसंग चला था। युवती ने 9 अक्तूबर 2019 को घर से भागकर लुधियाना के गुरुद्वारे में शादी रचा ली थी। साथ ही लुधियाना सेशन कोर्ट में परिवार से सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी। लेकिन इस दौरान कंबो थाना की पुलिस ने लड़की और लड़के को काबू कर जनरैल के खिलाफ केस दर्ज कर दिया। नमित मेहता ने कहा कि इसके चलते जरनैल की जिंदगी के बेशकीमती तीन साल जेल में बर्बाद हुए। वह जरनैल को मुआवजा दिलाने का केस दायर करेंगे।
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