पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक तौर पर सपोर्ट करने वाले पंजाब ग्रामीण बैंक (पीजीबी), सतलुज ग्रामीण बैंक (एसजीबी) और मालवा ग्रामीण बैंक (एमजीबी) के 1700 अधिकारी और कर्मचारी दो दिन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल पर चले गए हैं।
कपूरथला स्थित पंजाब ग्रामीण बैंक हेड ऑफिस के ऑल पंजाब ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एपीजीबीओए) और ऑल पंजाब ग्रामीण बैंक इंप्लाइज यूनियन (एपीजीबीईयू) के सदस्यों ने बैंकों में निजीकरण रोकने के लिए केंद्र सरकार को जगाने के लिए प्रदर्शन किया।
यह हड़ताल पीजीबी ऑफिसर्स और इंप्लाइज यूनियन पर आधारित ज्वाइंट एक्शन कमेटी के कन्वीनर पीएस रंधावा के नेतृत्व में राष्ट्रीय संगठन के आह्वान पर की गई है।
एपीजीबीओए के अध्यक्ष एपीएस बराड़, महासचिव पवन कुमार, एपीजीबीईयू के अध्यक्ष कुलवंत सिंह व महासचिव कुलदीप लूथरा ने बताया कि यह हड़ताल देशभर में दो दिन 10 और 11 मार्च को रहेगी।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों का कार्य पूरी तरह से ठप रहेगा। ग्रामीण बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों की 11 मांगों लंबे अर्से से लंबित हैं। इनके समाधान की तरफ केंद्र सरकार व पंजाब सरकार की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इसके रोष स्वरूप ही पंजाब में कार्यरत इन तीनों बैंकों के 1700 अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक तौर पर हड़ताल पर हैं।
उन्होंने बताया कि मांगों में बैंक को निजी हाथों में सौंपने के सरकारी प्रयास के विरोध के साथ-साथ अन्य कई गंभीर मुद्दे हैं, जिनको सरकार अनदेखा कर रही है। उन्होंने बताया कि पीजीबी के अधीन 13 जिलों में 260 शाखाएं, एसजीबी के अधीन चार जिलों में 40 शाखाएं और एमजीबी के अधीन आठ जिलों में 79 शाखाएं पीएम नरेंद्र मोदी के इस साल के बजट के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों को विकसित और आर्थिक तौर पर सुदृढ़ बनाने में लगी हुई हैं।
फिर भी उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पीजीबी के 1150, एसजीबी के 150 और एमजीबी के लगभग 400 बैंक अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर हैं। पीजीबी का हेड ऑफिस कपूरथला, एसजीबी का हेड आफिस बठिंडा और एमजीबी का हेड ऑफिस संगरूर में है।
पीएस रंधावा ने कहा कि इस हड़ताल के माध्यम से उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी तक ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले ग्रामीण बैंक कर्मियों की समस्याओं की तरफ ध्यान दिलाने का प्रयास किया है।
उन्होंने केंद्र सरकार को बैंक कर्मियों की इन मांगों को जल्द से जल्द मानने की मांग की है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे वित्तीय कार्यों में कोई बाधा न पड़े।