रिहा किया गया आंतकी हरदीप सिंह करीब दो सप्ताह के लिए पैरोल पर भी घर आया था।
उम्र
कैद की सजा के दौरान ही उसके मां-बाप मौत हो गई थी। रिहाई के बाद परिवार
से वक्त उसने मां-बाप की मौत का अफसोस प्रगट किया। उसने कहा कि वह चाहता था
कि उसकी रिहाई देखने के लिए उसके मां-बाप जिंदा होते। उसकी मां हमेशा ही
उसकी रिहाई के लिए वाहे गुरु के समक्ष अरदासें करती रहती थीं।
पंजाब
सरकार ने जेल में बंद एक आतंकी हरदीप सिहं को वीरवार रिहा कर दिया।
भिंडरावाला टाइगर फोर्स (बीटीएफ) का आतंकी हरदीप सिंह बीते 18 वर्ष से टाडा
के तहत जेल में सजा काट रहा था। सिख कैदियों की रिहाई को लेकर संघर्ष कर
रहे बापू सूरत सिंह खालसा की सूची में शामिल हरदीप दूसरा कैदी है। इससे
पहले बरेली जेल में बंद आंतकी वरियाम को रिहा किया गया था।
अमृतसर
केंद्रीय जेल के सुपरिटेडेंट आरके शर्मा कहा कहना है कि पंजाब सरकार ने
हरदीप सिंह की समय से पहले रिहाई के आदेश जारी किए थे। हरदीप सिंह तरनतारन
जिले के चूसलेवाड़ गांव का रहने वाला है। वह केंद्रीय जेल अमृतसर में सजा
काट रहा था। हरदीप को 1993 में गिरफ्तार किया गया था। हरदीप के घर में उसकी
पत्नी और दो पुत्र भी है। इससे पहले हरदीप करीब दो सप्ताह के लिए पैरोल पर
भी घर आया था।
जेल सुपरिंटेंडेंट का कहना है कि अब हरदीप सिंह को
दोबारा जेल आने की जरूरत नहीं है। जेल में सजा के दौरान हरदीप सिंह का
व्यवहार बिल्कुल ठीक था। गांव चूसलेवड़ थान पट्टी के रहने वाले हरदीप को
वर्ष 1993 में असलहे सहित पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसके साथ उसका एक
साथी भी पकड़ा गया था।