कठुआ कांड, सभी केंद्र
23वें गवाह ने कोर्ट में माना, मुझे टार्चर कर लिखवाए बयान
शनिवार को कोर्ट में पूरे दस्तावेज नहीं पेश कर पाया प्रोसिक्यूशन
दस्तावेज न होने से नहीं हो पाए 22वें गवाह के बयान
डिफेंस ने कहा, पुराने बयानों और रिकार्ड को पेश कर गुमराह कर रहा प्रोसिक्यूशन
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट। कठुआ दुष्कर्म और हत्याकांड के मामले में शनिवार को प्रोसिक्यूशन की ओर से 22वें गवाह के रूप में पेश किए गए फोटोग्राफर के बयान पर जिरह नहीं हो पाई। कोर्ट की ओर से मांगे गए पूरे दस्तावेज प्रोसिक्यूशन पेश नहीं कर पाया, इस कारण कोर्ट ने 23वें गवाह के बयान पर जिरह कराई। अब फोटोग्राफर के बयान सोमवार को दर्ज किए जाएंगे। वहीं 23वें गवाह ने भी पिटाई कर बयान लिखवाए जाने की बात कही है।
गवाह को क्राइम ब्रांच ने कई दिन तक पीटा
साहनी ने कहा कि जिस 23वें गवाह को पेश किया गया है, उनका काम केवल केस के वाकये का नक्शा बनाना था। बचाव पक्ष का जवाब है कि 3 अप्रैल को जब नक्शा बनाया जाना था तब उसके हाथों में हथकड़ी लगी थी, इस दौरान इस गवाह को क्राइम ब्रांच ने कई दिन तक पीटा। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें क्राइम ब्रांच के हर कमरे में पीटा गया, चाहे वो एसएसपी का कमरा हो, अन्य अधिकारियों के कमरे या कान्फ्रेंस हाल। इस गवाह ने कोर्ट में माना कि क्राइम ब्रांच ने उसे टॉचर्र कर बयान लिए और लिखवाए, जिसकी शिकायत कोर्ट में की जा चुकी है।
डीजीपी के खिलाफ हो सीबीआई जांच
बचाव पक्ष के वकील एके साहनी ने कहा कि प्रोसिक्यूशन की ओर से पेश किए गए सप्लीमेंट्री चलान में वही बयान डाले गए हैं, जिन पर 26 जुलाई को जिरह हो चुकी है। 9 अप्रैल को यह रिकॉर्ड जमा भी हो चुका है। पुराने बयानों को ही सप्लीमेंट्री चालान के रूप में प्रोसिक्यूशन पेश कर रहा है। साहनी ने कहा कि यह केस ऐसा है जिस पर 125 करोड़ देशवासियों की नजर टिकी है। सप्लीमेंट्री चालान का मतलब नए गवाह, सुबूत पेश करना होता है, न कि पुराने बयान या गवाहों को रि-कंस्ट्रक्शन करना। प्रोसिक्यूशन इस केस में इनोवेशन कर रहा है। रि-इन्वेस्टिगेशन की पावर किसी के पास भी नहीं है, प्रोसिक्यूशन की बात दूर की है। यह पावर तो मजिस्ट्रेट या सेशन जज के पास भी नहीं है। इसका एकमात्र तरीका था कि हाईकोर्ट में प्रॉसिक्यूशन केस लगाता और वहां से रि-इन्वेस्टिगेशन की परमिशन लेता। लेकिन इसके उलट अप्रैल में हुए बयान और रिकार्ड को प्रोसिक्यूशन दोबारा पेश कर गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। साहनी ने कहा कि क्राइम ब्रांच से कौन नहीं डरता। अब तक 5 लोगों ने क्राइम ब्रांच के खिलाफ टॉर्चर करने की शिकायत कोर्ट में दी है। जिस पर कोर्ट ने सारी इन्क्वायरी जेएंडके डीजीपी को ट्रांसफर की है। लेकिन पुलिस अपने ही मुलाजिमों को गलत क्यों कहेगी। साहनी ने कहा कि डीजीपी की सीबीआई जांच होनी चाहिए। मामले में सोमवार को 22वें गवाह के बयान पर जिरह की जाएगी।