पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरदासपुर के भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेता और पंजाब वर्किंग समिति के सदस्य यादविंदर सिंह बुट्टर को पैसों के लेन देन से संबंधित मामले में बरी कर दिया है। सीनियर एडवोकेट एपीएस देओल ने इस संबंध में जानकारी दी है। जिक्रयोग्य है कि 2011 में मलोट में कुछ व्यक्तियों ने भाजपा नेता बुट्टर सहित 3 अन्य के खिलाफ पैसों के लेने देने के मामले में धोखाधड़ी और विश्वासघात का मामला मोहाली थाने में दर्ज हुआ था। इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए यादविंदर सिंह बुट्टर पहले दिन से यह दावा रहे थे कि यह पर्चा जिला गुरदासपुर के साथ संबंधित पूर्व अकाली मंत्री सेवा सिंह सेखवां की साजिश और शह का हिस्सा है। क्योंकि बुट्टर की 2008 से सेवा सिंह सेखवां के साथ अदालती और राजनीतिक लड़ाई चल रही है। बता दें कि बुट्टर पहले अकाली दल में थे। बुट्टर के मुताबिक सेखवां ने पंजाब के अलग- अलग जिलों में उनके खिलाफ कई पर्चे दर्ज करवाए हैं। इनमें से ही एक मामले में मोहाली की निचली अदालत ने बुट्टर को 420 की धारा से तो बरी कर दिया था, परंतु धारा 406 में तीन साल की सजा सुनाई थी। बुट्टर ने मोहाली की सेशन कोर्ट में चुनौती दी, परंतु वहां भी यह सजा बहाल रही। इसके बाद बुट्टर की इस केस में मोहाली में गिरफ्तारी भी हो गई और उन को कुछ समय रोपड़ की जेल में भी रहना पड़ा। बुट्टर के मुताबिक पर्चे में शामिल अन्य तीन व्यक्तियों ने समझौता कर लिया था। परंतु वह इस बात पर अड़े रहे कि वह कानूनी लड़ाई लड़कर बाइज्जत बरी होंगे। उन्होंने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट रमदीप प्रताप सिंह के जरिये जमानत की अर्जी लगाकर हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी थी। अब बुट्टर के केस की पैरवी सीनियर एडवोकेट एपीएस दिओल कर रहे थे। हाईकोर्ट में पेश किए सबूतों और तथ्यों के आधार पर यादविंदर सिंह बुट्टर को सभी आरोपों से मुक्त करते हुए बरी कर दिया है।