दिल्ली के सरोजिनी नगर के रहने वाले रवींद्र के नाम पर पंजीकृत है कार
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने गांव नेपाल से गिल के उसके चाचा के घर पर खड़ी फाॅर्च्युनर कार और 10 करोड़ की कोकीन को कब्जे में ले लिया है। यह कार दिल्ली के सरोजिनी नगर में रहने वाले रवींद्र के नाम से पंजीकृत है, लेकिन वास्तव में कार गिल के बेटे की होने की बात सामने आ रही है। जतिंदर सिंह दिल्ली से पंजाब इसी कार से एक अक्तूबर को गया था।
तीन अक्तूबर को चाचा के घर छोड़ी थी कार
गिरोह के चार सदस्यों के पकड़े जाने व गोदाम से ड्रग्स की खेप जब्त हो जाने के बाद खुद को बचाने के लिए जतिंदर सिंह गिल तीन अक्तूबर को कार चाचा के घर पर छोड़कर इंग्लैंड भागने के लिए अमृतसर एयरपोर्ट पर पहुंचा था, तब उसे भी सुरक्षा एजेंसियों ने दबोच लिया था। जांच में सामने आया है कि दुबई से वीरेंद्र वछोया के बेटे ने किसी को फोन कर जतिंदर सिंह को पिलंजी गांव से उसे फाॅर्च्युनर कार मुहैया करवाई थी।
पुणे में पकड़ी गई थी नशे की बड़ी खेप
वीरेंद्र को वर्ष 2011 मे भी ड्रग्स तस्करी के एक मामले मे गिरफ्तार किया गया था। डीआरआई ने उसे गिरफ्तार किया था। उस मामले में वह दो साल तक जेल में बंद रहा था। जेल से बाहर आने के बाद वीरेंद्र फिर से ड्रग्स गिरोह से जुड़ गया। दुबई भागने के पहले पुणे क्राइम ब्रांच ने फरवरी में वछोया के नेटवर्क से 3,000 करोड़ की म्याऊ-म्याऊ ड्रग्स की खेप पकड़ी थी, जिसे बाद में जांच के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मुंबई को ट्रांसफर कर दी गई थी।
नाइजीरियन को होनी थी सप्लाई
उस वक्त भी मुंबई पुलिस ने वछोया की एनओसी फाइल खोली थी। इसमें एक व्यक्ति तुषार गोयल से पूछताछ में पता चला है कि वछोया का दिल्ली एनसीआर में रहकर ड्रग्स का कारोबार करने वाले नाइजीरिया के लोग से गहरा संबंध है। करीब 150 किलो कोकीन दिल्ली में वछोया के निर्देश पर एक नाइजीरिया को नए साल से पहले आपूर्ति की जानी थी।