यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन की अपील पर सार्वजनिक क्षेत्र में काम कर रहे दस लाख से ज्यादा बैंक अफसर और कर्मचारी 20 और 21 फरवरी को दो दिवसीय हड़ताल करेंगे। इस हड़ताल में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, को-आपरेटिव बैंक भी शामिल होंगे।
पंजाब बैंक इंप्लाइज फेडरेशन ने इस हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है। बैंकों के अलावा अधिकतर ट्रेड यूनियन भी सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ हड़ताल के दौरान अपनी आवाज बुलंद करेंगी।
पंजाब बैंक इंप्लाइज फेडरेशन के सचिव नरेश गौड़ का कहना है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में महंगाई अपने चरम पर पहुंच गई है। एक तरफ तो सरकार महंगाई को रोकने में बुरी तरह से नाकाम साबित हुई है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
गौड़ ने कहा कि यूपीए सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण मजदूरों से उनके हक छीने जा रहे हैं। इसके अलावा बैंकिंग सुधारों के तहत निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। कारपोरेट सेक्टर को मुनाफा कमाने के लिए बैंकों के लाइसेंस दिए जा रहे हैं। इसके अलावा ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसे मुलाजिम वर्ग बर्दाश्त नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए बैंकों का काम बैंकिंग के अलावा सामाजिक क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभाना है। लेकिन निजी क्षेत्र के बैंक ऐसा नहीं कर सकते। इन सभी मुद्दों समेत यूपीए सरकार की खराब नीतियों से परेशान होकर ही दो दिन की हड़ताल की जा रही है।