ट्रंप, पुतिन और जेलेंस्की (फाइल)
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यूक्रेन-रूस युद्ध: चौथे साल में भी नहीं थमी आग
साल 2025 यूक्रेन-रूस युद्ध के लिए बेहद निर्णायक साबित हुआ। तीन साल से अधिक समय से जारी इस संघर्ष ने 2025 में और गंभीर रूप ले लिया, जिसका असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कूटनीति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी साफ नजर आया। साल की शुरुआत से ही दोनों देशों के बीच लड़ाई तेज हो गई। रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे, बिजली ग्रिड और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। कीव, खारकीव और ओडेसा जैसे प्रमुख शहरों पर बार-बार हुए हवाई हमलों से आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। जवाब में यूक्रेन ने भी रूस के सीमावर्ती इलाकों और रणनीतिक ठिकानों पर ड्रोन हमले तेज कर दिए। साल के मध्य तक हालात ऐसे हो गए कि यह युद्ध लंबे समय तक खिंचने वाले संघर्ष में तब्दील हो गया, जहां किसी भी पक्ष को निर्णायक बढ़त नहीं मिल सकी।
इस दौरान यूक्रेन को अमेरिका, यूरोपीय संघ और नाटो देशों से लगातार सैन्य और आर्थिक सहायता मिलती रही। उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम, आधुनिक हथियार और वित्तीय मदद ने यूक्रेन को मोर्चे पर टिके रहने में सहारा दिया। वहीं, पश्चिमी देशों ने रूस पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ गया। इसके जवाब में रूस ने चीन, ईरान और कुछ अन्य देशों के साथ व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश की।
शांति की दिशा में भी 2025 में कई प्रयास किए गए। अमेरिका और यूरोपीय देशों की पहल पर मियामी, बर्लिन और जिनेवा में अनौपचारिक वार्ताएं हुईं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि उनका देश शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास और जमीनी हालात के चलते साल भर कोई ठोस शांति समझौता नहीं हो सका।