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मासूमों को पोलियो से बचाने को कहीं जान जोखिम में डाल नदी पार की तो कहीं पहाड़ लांघा

Sat, 26 Oct 2019 06:20 PM IST
अमित कुमार यूएन हिंदी समाचार
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भारत में पोलियो की दवा को बेहद सावधानीपूर्वक लेकर रस्सी के सहारे नदी पार करता एक वॉलिंटयर्स। - फोटो : यूनिसेफ
पोलियो आज दुनियाभर से खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है। 1988 की तुलना में इस बीमारी से प्रभावित बच्चों के मामलों में 99 फीसदी तक कमी आई है। इसके बावजूद कई बार ये खतरनाक बीमारी मासूमों को अपनी चपेट में लेने मे कामयाब हो रही है। इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए दुनियाभर में लोग दिन रात कड़ी मेहनत करने में जुटे हुए हैं। 24 अक्तूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया गया। इस मौके पर यूनिसेफ के वॉलिंटयर्स और स्वास्थकर्मियों ने 95 देशों में बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई। इस दौरान कई मुश्किलें आईं, लेकिन कोशिश करने वाले आखिर कब हारे हैं। 'जिंदगी की दो बूंद' पिलाने के लिए इन स्वयंसेवकों ने कहीं पहाड़ लांघा तो कहीं रस्सी के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार की। आइए विभिन्न देशों में मुश्किलों को पीछे छोड़कर अपना फर्ज निभाने वालों के जज्बे को सलाम करते हैं। 
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हिंसा प्रभावित पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में नजीबा पोलियो से लड़ने के लिए कई वर्षों से अपनी सेवाएं दे रही हैं। - फोटो : यूनिसेफ
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी हर साल एक अरब खुराकों का वितरण कर रही है लेकिन अब भी हजारों की संख्या इसे नहीं ले पा रहे हैं। 1988 में पोलियो के साढ़े तीन लाख से ज़्यादा मामले सामने आए थे लेकिन अब इनकी संख्या घटकर महज 40 रह गई है। पोलियो से प्रभावित देशों की संख्या में भी कमी आई है। 
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दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में बच्चों के लिए दवा ले जाने की कोशिश में ट्रॉली में बैठकर नदी पार करते स्वास्थ्यकर्मी। - फोटो : यूनिसेफ
बीमारी पर काबू पाने के प्रयासों के तहत कई पहलों को शुरू किया गया। इनमें ‘ग्लोबल पोलियो इरेडीकेशन इनिशिएटिव’ भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी, यूनीसेफ और अन्य साझेदार संगठनों के प्रयासों के फलस्वरूप 1.8 करोड़ लोग आज चल पा रहे हैं, नहीं तो वे इस अपंग बनाने वाले वायरस का शिकार हो जाते। 

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हिंसाग्रस्त यमन में दुर्गम पहाड़ी रास्तों से गुजरती स्वास्थ्यकर्मी टीम। - फोटो : यूनिसेफ
पोलियो वैक्सीन से अछूते बच्चे आमतौर पर हिंसक संघर्ष से प्रभावित या फिर दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहते हैं, जहां पहुंचना एक बड़ी चुनौती है। वंचित समुदाय पहले से बुनियादी सुविधाओं जैसे जल, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता जैसी मुश्किलों को झेल रहे हैं। ऐसे में पोलियो वैक्सीन मुहिमों का लक्षित ढंग से संचालित किए जाने की आवश्यकता है।
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नेपाल के दुर्गम इलाकों में पोर्टर के माध्यम से दवाएं पहुंचाई गई। - फोटो : यूनिसेफ
पोलियो उन्मूलन की दिशा में हुए प्रयासों से पिछले 30 सालों में स्वास्थ्य देखरेख में 27 अरब डॉलर की बचत करने में मदद मिली है।
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कंबोडिया में स्पीडबोट से तटीय गांवों तक पहुंचते स्वास्थ्यकर्मी। - फोटो : यूनिसेफ
एक समय नाइजीरिया में पोलियो बीमारी एक बड़ी चुनौती थी लेकिन पिछले तीन साल से वहां इस बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया है. उम्मीद जताई गई है कि वर्ष 2020 तक नाइजीरिया को भी पोलियो मुक्त घोषित कर दिया जाएगा।
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पाकिस्तान में जीप से दवाओं को पहुंचाया गया। ज्यादा तापमान की वजह से दवाओं को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती होती है। - फोटो : यूनिसेफ
पहले पोलियो से 125 देशों में लोग पीड़ित थे लेकिन अब सिर्फ दो देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान में इसके मामले देखने को मिले हैं। 
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