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Turkey-Syria Earthquake: तुर्किये-सीरिया में मृतकों का आंकड़ा 15 हजार से पार, अभी भी मलबे में दबे हैं लोग

Thu, 09 Feb 2023 07:13 AM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तुर्किये और सीरिया में आलम ये है कि मलबे के अंदर से जिंदा लोग चीख रहे हैं, लेकिन उनकी मदद करने वाला कोई नहीं है। आइए जानते हैं अभी तुर्किये और सीरिया में क्या हालात हैं? कैसे राहत-बचाव कार्य चल रहा है? किन-किन देशों ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है? 
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तुर्किये में भूकंप का कहर - फोटो : सोशल मीडिया
तुर्किये और सीरिया में भूकंप के कहर से मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। द एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, तुर्की और सीरिया में शक्तिशाली भूकंपों के कारण अब तक 15,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। व्यापक तबाही के बीच मरने वालों की संख्या में वृद्धि जारी है। करीब 50 हजार से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। बड़ी तादात में लोग अभी भी मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। 

इस बीच, तुर्किये में एक बार फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, तुर्किये के नूरदगी शहर में ये भूकंप महसूस हुआ है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 मापी गई है। 

वहीं, भूकंप से आई तबाही के बाद मलबे के नीचे लोगों के जिंदा होने की अभी भी आशंका है। इसको देखते हुए राहत-बचाव का काम भी काफी संभलकर चल रहा है। जो जिंदा हैं, वो मलबों के ढेर में अपनों को तलाश रहे हैं। दिनरात मलबे की खुदाई चल रही है। लोग हाथों से भी मलबा साफ कर रहे हैं। कई जगहों पर रेस्क्यू करने वालों की कमी पड़ गई है। आलम ये है कि मलबे के अंदर से जिंदा लोग चीख रहे हैं, लेकिन उनकी मदद करने वाला कोई नहीं है।

आइए जानते हैं अभी तुर्किये और सीरिया में क्या हालात हैं? कैसे राहत-बचाव कार्य चल रहा है? किन-किन देशों ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है? 
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मलबे के ढेर में रातभर अपनों को तलाशते रहे लोग। - फोटो : सोशल मीडिया
वो जिंदा हैं, उन्हें बाहर निकालने वाला कोई नहीं है
सीरिया के अली बट्टल कहते हैं, 'मेरा पूरा परिवार वहां है। मेरे बेटे, मेरी बेटी, मेरा दामाद ... उन्हें बाहर निकालने वाला कोई और नहीं है। उसका चेहरा खून से लथपथ था और सिर ऊनी शॉल में लिपटा हुआ था। उन्होंने कहा, 'मैं उनकी आवाज सुनता हूं। मुझे पता है कि वे जिंदा हैं, लेकिन उन्हें बचाने वाला कोई नहीं है। सीरियाई स्वास्थ्य मंत्रालय ने अलेप्पो, लताकिया, हमा और टार्टस के प्रांतों में क्षति की सूचना दी है।  त्रासदी से पहले भी, अलेप्पो में इमारतें जीर्ण-शीर्ण बुनियादी ढांचे के कारण अक्सर ढह जाती थीं। 



आंकड़ों के अनुसार, तुर्किये और सीरिया में मलबे के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू के काम में करीब एक लाख से ज्यादा लोग जुटे हुए हैं। इसमें अलग-अलग देशों की ट्रेंड टीमें भी शामिल हैं। भारत सरकार ने भी रेस्क्यू के लिए एनडीआरएफ की टीम भेजी है। इसी तरह अमेरिका, चीन समेत कई देशों से दोनों देशों को मदद पहुंचाई जा रही है। हालांकि, इसके बावजूद रेस्क्यू टीम कम पड़ गई है। हालात इतने बुरे हैं कि मलबे के अंदर से जिंदा लोग चीख रहे हैं और उन्हें सुनने वाला कोई नहीं है।  
 
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मलबे के ढेर से बच्ची को सुरक्षित निकाला गया। - फोटो : सोशल मीडिया
ठंड से ठिठुर रहे लोग, बच्चों की हालत खराब
भूकंप ने हजारों की संख्या में घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। इससे लाखों लोग बेघर हो गए हैं। इस दौरान तुर्किए और सीरिया में कड़ाके की ठंड ने भी लोगों को मुसीबत में डाल दिया है। लोग सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। ठंड के चलते सबसे ज्यादा बच्चों की हालत खराब हो रही है। 

संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और खाड़ी राज्यों सहित दर्जनों देशों ने तुर्किये और सीरिया को मदद करने का वादा किया है। इन देशों में खोजी दलों के साथ-साथ राहत सामग्री हवाई मार्ग से पहुंचनी शुरू हो गई है। फिर भी कुछ सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने कहा कि उन्हें लगता है कि उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। 




तुर्किये के शहर कहरमनमारस में अली सगिरोग्लू कहते हैं, 'मैं अपने भाई को खंडहर से वापस नहीं ला सकता। मैं अपने भतीजे को वापस नहीं ला सकता। इधर-उधर देखिए... यहां कोई सरकारी अधिकारी नहीं है।' सगिरोग्लू आगे कहते हैं, 'दो दिनों से हमने यहां आसपास सरकार को नहीं देखा है...बच्चे ठंड से ठिठुर रहे हैं। सर्दियों के तूफान ने कई सड़कों को उजाड़ दिया है। उनमें से कुछ भूकंप से क्षतिग्रस्त हो गए।' 
 

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मलबों में अपनों को तलाशते लोग - फोटो : सोशल मीडिया
23 करोड़ से ज्यादा लोग हो सकते हैं प्रभावित
ताजा आंकड़े बताते हैं कि तुर्किये में साढ़े छह हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं और सीरिया में कम से कम डेढ़ हजार लोगों की जान जा चुकी है। कुल मिलाकर अब तक करीब आठ हजार मौतें हुईं हैं। ऐसी आशंका हैं कि मरने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि होगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक दिन पहले ही अनुमान लगाया है कि मृतकों की संख्या आठ गुना अधिक हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि बड़े पैमाने पर भूकंप से 23 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हो सकते हैं। 

 
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तुर्किये में भूकंप का कहर - फोटो : सोशल मीडिया
रातभर लोग हाथों से हटाते रहे मलबे
हजारों धराशायी इमारतों के मलबे में दबे दसियों हजार लोगों की टूटती सांस के लिए हर बीत रहा पल बेशकीमती है। इन टूटती सांसों को जिंदगी देने में जुटे बचावकर्मी जीजान से कोशिश कर रहे हैं। बर्फीली रात में सैकड़ों बचावकर्मी हाथों से भी मलबा हटाकर लोगों की तलाश में जुटे रहे हैं। तुर्की और सारिया में स्थानीय और विदेशी बचाव दल शून्य से नीचे के तापपमान के बीच ढही टनों वजनी छतों और दीवारों में फंसी जिंदगियों को बचाने के लिए समय से संघर्ष कर रहे हैं।

कई हजार लोगों का तो पता ही नहीं है, जो नींद में ही मौत की नींद सो गए। मलबा साफ होने के साथ बच्चों और अन्य परिवारीजनों के शव निकलते देखना दिल तोड़ देता है। एपिसेंटर के करीब बसे मालट्या में 5 लाख लोग रहते हैं। इलाके में कई सौ इमारतें पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं। वहीं, मलबे पर बर्फबारी के कारण बचाव कार्य ठीक से नहीं हो पा रहा है।  
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तुर्किये में भूकंप का कहर - फोटो : सोशल मीडिया
भूकंप के चलते 10 फीट तक खिसक गया तुर्की
इटली के भूकंप विज्ञानी डॉ. कार्लो डोग्लियोनी ने इस बारे में डिटेल जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सीरिया की तुलना में तुर्की की टेक्टोनिक प्लेट्स 5 से 6 मीटर तक खिसक सकती है। उन्होंने आगे बताया कि असल में तुर्की कई मेन फॉल्टलाइन पर स्थित है। यह एनाटोलियन प्लेट, अरेबियन प्लेट और यूरेशियाई प्लेट से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि यहां भूकंप आने का खतरा सबसे अधिक रहता है। वहां के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एनाटोलियन प्लेट और अरैबियन प्लेटके बीच की 225 किलोमीटर की फॉल्टलाइन टूट गई है।

 
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सीरिया ने इस्राइल की मदद ठुकराई
सीरियाई सरकार समर्थक अखबार अल-वतन ने सोमवार को एक आधिकारिक स्रोत का हवाला देते हुए भूकंप राहत के लिए इस्राइल से मदद मांगे जाने के दावों को खारिज कर दिया। पड़ोसी देश तुर्किये में आए शक्तिशाली भूकंप में सीरिया के सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और एक हजार से अधिक लोग घायल हो गए। इस्राइल और सीरिया जैसे अरब देशों का विवाद काफी पुराना है। 1948 में अस्तित्व में आने के तुरंत बाद यहूदी देश को अपने पड़ोसी अरब देशों से युद्ध का सामना करना पड़ा था। 1967 में हुई छह दिनों की जंग तो पूरी दुनिया को याद है जिसमें इस्राइल ने अकेले मिडिल ईस्ट का नक्शा बदल दिया था।

खबरों की मानें तो इस्राइल ने पहले कहा था कि सीरिया ने उससे भूकंप राहत में सहायता के लिए मदद मांगी थी और वह इसके लिए तैयार है। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने भूकंप प्रभावित सीरिया को मदद भेजने की मंजूरी दे दी है। लेकिन सीरिया के एक अधिकारी ने मदद मांगे जाने की खबरों से ही इनकार कर दिया। नेतन्याहू ने अपनी लिकुड पार्टी के सांसदों से कहा, 'इस्राइल को 'सीरिया के लिए मानवीय सहायता का अनुरोध एक राजनयिक स्रोत से प्राप्त हुआ है। मैंने इसे मंजूरी दे दी है।'

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तुर्किये में भूकंप का कहर - फोटो : सोशल मीडिया
पहले से थी चेतावनी
तुर्किये दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंप क्षेत्रों में से एक है। देश का आखिरी 7.8-तीव्रता का झटका 1939 में आया था, जब पूर्वी एर्जिंकन प्रांत में 33,000 लोग मारे गए थे। 1999 में डुज के तुर्किये क्षेत्र में 7.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 17,000 से अधिक लोग मारे गए थे। विशेषज्ञों ने लंबे समय से चेतावनी दी है कि एक बड़ा भूकंप इस्तांबुल को तबाह कर सकता है, जो 16 मिलियन लोगों के मेगालोपोलिस में जर्जर घरों से भरा हुआ है। 

तुर्किये पहुंची भारत की चौथी फ्लाइट
भूकंप प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए भारत से राहत-बचाव की चौथी फ्लाइट बुधवार को तुर्किये में लैंड हुई। इसमें इंडियन आर्मी की 54 सदस्यीय मेडिकल टीम भी तुर्किये पहुंची है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर खाद्य पदार्थ भी पहुंचाया गया है। 
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एक भारतीय लापता: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के सचिव संजय वर्मा ने कहा, तुर्किये में 1939 के बाद में आई यह सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा है। हमें सहायता के लिए तुर्की की ओर से एक ईमेल प्राप्त हुआ और बैठक के 12 घंटे के भीतर, दिल्ली से तुर्की के लिए उड़ानें रवाना हुईं। उन्होंने बताया, इसके बाद दो एनडीआरएफ और दो मेडिकल टीमों को भी भेजा गया। उन्होंने बताया, हमने तुर्किये के अदाना में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। 10 भारतीय, प्रभावित क्षेत्रों के सुदूर हिस्सों में फंसे हुए हैं लेकिन वे सुरक्षित हैं। एक भारतीय नागरिक जो व्यापारिक यात्रा पर था, लापता है। हम उनके परिवार और बेंगलुरू की उस कंपनी के संपर्क में हैं, जहां वे काम करते हैं। 

वहीं एनडीआरएफ डीजी अतुल करवाल ने बताया, हमारी दो टीमें वहां पहुंची हैं। कुल 7 वाहन, 101 बचावकर्ता-जिसमें 5 महिला बचावकर्मी और 4 खोजी कुत्ते शामिल हैं। ये टीमें पहले से ही ऑपरेशन में हैं। उन्होंने बताया, पहली टीम अदाना एयरपोर्ट पर उतरी और दूसरी को उर्फा डायवर्ट कर दिया गया क्योंकि अदाना में भीड़ थी। दोनों टीमें सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में हैं। 
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