जापान में सुमो पहलवानी का खेल सदियों पुराना है। जापान में इन भारी भरकम पहलवानों को रिकिशी कहा जाता है।
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सुमो पहलवान अभ्यास करते हुए
इस खेल में सुमो पहलवान का वजन 100 किलो से ज्यादा होना जरूरी होता है। एक सुमो पहलवान औसतन 60 से 65 साल तक ही जीता है।
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खाना खाते हुए सुमो पहलवान
नागोया शहर के एक बौद्ध मठ में सुमो पहलवान की दिन की शुरुआत रोज सुबह तीन से चार घंटे अभ्यास करके होती है।
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कड़े अभ्यास के दौरान सुमो पहलवान
किसी भी सुमो पहलवान की पहचान उसका वजन होती है। अपनी इस पहचान को बनाए रखने के लिए एक पहलवान रोजाना 10 हजार कैलेरी लेता है जबकि एक सामान्य शख्स 2 हजार कैलेरी ही लेता है।
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ऑक्सीजन मास्क लगाए हुए सुमो पहलवान
सुमो पहलवान आम आदमी के मुकाबले 10 गुना ज्यादा खाते हैं। इसके कारण उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है और उन्हें ऑक्सीजन मास्क लगाकर सोना पड़ता है।
जापान में इस खेल से धीरे-धीरे लोगों का जुड़ाव कम हुआ है। वजह है जापानी सुमो पहलवान का खेल में कम रूचि लेना। वहीं अब मंगोलिया और विश्व के अन्य देशों में सुमो पहलवानी का दबदबा बढ़ता जा रहा है।