रूस लगातार अपनी सैन्य ताकत में इजाफा कर रहा है। इसी क्रम में रूसी नेवी ने विश्व की सबसे लंबी पनडुब्बी बेलगोरोड को अपने नौसेनिक बेड़े में शामिल किया है। इस पनडुब्बी की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह किसी भी बड़े शहर को पल भर में राख के ढेर में बदल दे। यहां जानिए इस पनडुब्बी से जुड़ी ये खास बातें:
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बेलगोरोड पनडुब्बी
- फोटो : सोशल मीडिया
बेलगोरोड पनडुब्बी का सैन्य परीक्षण अगले साल से शुरू किया जाएगा। जबकि, इसकी रणनीतिक तैनाती 2021 में होगी। बता दें कि विश्व में रूस और अमेरिका सबसे ज्यादा पनडुब्बियों तो ऑपरेट करते हैं। भारत भी रूसी अकूला क्लास की पनडुब्बियों का संचालन कर रहा है। इसके अलावा जल्द एक और परमाणु ताकत से लैस पनडुब्बी रूस से खरीदे जाने की योजना है।
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बेलगोरोड पनडुब्बी
- फोटो : सोशल मीडिया
दुनिया की सबसे लंबी पनडुब्बी बेलगोरोड की लंबाई 604 फीट है। जो छह परमाणु तारपीडो से लैस है। इससे रूस की सैन्य ताकत में भारी इजाफा होगा।
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बेलगोरोड पनडुब्बी
- फोटो : सोशल मीडिया
यह पनडुब्बी इतने गुपचुप तरीके से अपने मिशन को अंजाम देगी कि इसे रूस का अंडरवाटर इंटेलिजेंस एजेंसी नाम दिया गया है। बेलगोरोड पनडुब्बी के कप्तान सीधे राष्ट्रपति पुतिन को रिपोर्ट करेंगे।
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बेलगोरोड पनडुब्बी
- फोटो : सोशल मीडिया
विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि अगर इन परमाणु तारपीडो में से किसी एक का भी प्रयोग किया जाता है तो समुद्र में रेडियोएक्टिव सुनामी आ सकती है। इस पनडुब्बी की तैनाती अमेरिका समेत कई देशों के लिए खतरा बन सकती है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
इसमें लगे तारपीडो अपने साथ दो मेगाटन के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। इनकी क्षमता अमेरिका द्वारा जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 130 गुना ज्यादा है। सोवियत संघ के विघटित होने के बाद से रूस कमजोर हो गया था। इसके अलावा अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के प्रतिबंधों ने रूसी अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया था। रूस कई देशों को युद्धक हथियार बेचकर मुनाफा कमा रहा है।
बेलगोरोड पनडुब्बी 80 मील प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकती है। जो समुद्र के भीतर 1700 फीट गहराई तक जा सकेगी। इस पनडुब्बी को सोनार से पता लगाना बहुत मुश्किल है।