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रूस में घातक हथियार AK-47 बनाने वाले मिखाइल क्लाशनिकोव को किया गया याद

Wed, 27 Mar 2019 07:51 PM IST
तिवारी अभिषेक amarujala.com-presented by: अभिषेक तिवारी
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A Statue of Mikhail Kalashnikov
रूस में मंगलवार को AK-47 राइफल के आविष्कारक मिखाइल क्लाशनिकोव के स्टेच्यू का अनावरण कर उन्हें याद किया गया। एक अनुमान के मुताबिक एके-47 को दुनिया का सबसे ज्यादा घातक हथियार माना गया है। आइए जानते हैं AK-47 राइफल और इसके निर्माता मिखाइल से जुड़ी कुछ खास बातें...
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A Statue of Mikhail Kalashnikov
आपको बता दें कि AK-47 राइफल वर्ल्ड का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला हथियार है। इसके बारे में बताया जाता है कि इसे किसी भी मौसम में किसी भी एंगल से आसानी के साथ चलाया जा सकता है।
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AK-47 अपनी खूबियों के कारण जल्द ही पूरी दुनिया में मशहूर हो गई और सभी देशों की सेनाएं इसका उपयोग करने लगीं है। साथ ही इसको विदेशी देशों में सबसे प्रसिद्ध रूसी ब्रांड का हथियार माना गया। इसके अलावा एके-47 को दुनिया भर में प्रतिरोधी आतंकवादी समूहों के लिए प्रतीक माना जाता था।
 
 

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मिखाइल क्लाशनिकोव एक रूसी सैनिक थे, उन्होंने AK-47 को साल 1947 में बनाया था। जिस समय मिखाइल क्लाशनिकोव एके-47 को बनाया उस समय उनकी उम्र महज 21 साल की थी। AK-47 के बारे में कहा जाता है कि इस हथियार से विश्व में सबसे ज्यादा हत्याएं की गई हैं। इससे एक मिनट में 600 गोलियां दागी जा सकती हैं। 

 
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मिखाइल क्लाशनिकोव रूस के प्रसिद्ध हथियार बनाने वाले सैनिक के तौर पर जाना जाता है। साथ ही इन्हें आधुनिक समय का युद्ध देवता भी कहा जाता है। उन्होंने कभी किसी युद्ध में भाग नहीं लिया लेकिन उन्होंने सबसे खतरनाक हथियार AK-47 असाल्ट राइफल के विकास के लिए जाना जाता है। इनका जन्म 10 नवम्बर 1919 में कुर्या में हुआ था। इन्हें कई अवार्ड्स से भी सम्मानित किया गया। 

 
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 AK-47 का पूरा नाम ऑटोमैटिक क्लाशनिकोव 47 है। मिखाइल क्लाशनिकोव ने अपनी सेना के लिए इसे हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती रहने के दौरान बनाया था। इसकी लंबाई 3 फुट और वजन साढ़े चार किलोग्राम होता है। बता दें कि AK-47 राइफल में ऑटोमैटिक का मतलब है कि एक बार ट्रिगर दबाकर रखने से गोलियां चलती रहती हैं और सेमीऑटोमैटिक का अर्थ है एक बार ट्रिगर दबाने से ही गोली चलती है। 
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AK- 47
ये इस्तेमाल करने में बेहद आसान गन मानी जाती है। इसकी रेंज 300 से 400 मीटर तक होती है और कहा जाता है कि एक नौसिखिया भी इससे अचूक निशाना लगा सकता है।
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