कभी जो खुलेआम खून बहाते थे वो आज अपना पसीना बहाकर कुछ अलग करने की कोशिश में लगे हुए हैं। पुरस्कार विजेता फोटोग्राफर जोर्डी रूज चेरी ने निकारागुआ के आपराधिक गिरोहों के सदस्यों के प्लंबर बनने की कहानी अपनी तस्वीरों में दर्ज की है।
निकारागुआ के बंदरगाह शहर बिलवी की तस्वीर, जहां अक्सर बिजली गुल रहती है और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
निकारागुआ में खराब पर्यावरण, भीड़भाड़ वाले स्कूल और काम के सीमित अवसरों के कारण युवा ड्रग और अपराध की तरफ चले जाते हैं।
ये तस्वीर 21 साल के रॉन की है जो सेंट गिल में सक्रिय यंग एसजी गैंग के सदस्य थे। यह गैंग दूसरों पर पत्थरों, चाकुओं और कभी-कभी बंदूकों से हमले करता था।
रॉन आपराधिक गैंग छोड़ अंतरराष्ट्रीय चैरिटी वॉटर एड का हिस्सा बने। अब वह खुश हैं कि इससे वे जल संकट दूर करने की मुहिम का हिस्सा बन पाएंगे और परिवार के लिए कमा भी पाएंगे।
19 साल के एल्टन भी ऐसे ही एक आपराधिक गैंग छोड़कर अंतरराष्ट्रीय चैरिटी वॉटर एड की ट्रेनिंग स्कीम का हिस्सा बन गए। एल्टन खुश हैं कि वो अब सही रास्ते पर हैं। उनका कहना है कि गैंग का सदस्य रहते हुए वह कभी भी मारे जा सकते थे।
16 साल की बेसी एक ऐसे इलाके में रहती हैं, जहां कई आपराधिक गैंग सक्रिय हैं। बेसी ने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है।
बेसी के मुताबिक उनके इलाके के लोग स्कूल से निकलने के बाद कुछ नहीं करते। उनमें से कुछ आपराधिक गैंग का हिस्सा बन जाते हैं।
बेसी कहती हैं, "मैं समुदाय के साथ मिलकर काम करना चाहती थी। मेरे आत्मविश्वास और आत्मसम्मान में फ़र्क आया है। वॉटर एड कोर्स के तहत मेरा सबसे प्रिय काम कुएं की सफ़ाई, शौचालय और रस्सी पंप कुएं बनाना है।"
सुयेन इस स्कीम की एक ग्राहक हैं और इसी योजना के तहत उन्हें अपना कुआं मिला है।
सुयेन के मुताबिक़ कुछ युवकों ने मिलकर उनका कुआं बनाया। इस काम में चार लड़के और एक लड़की शामिल थे।
वॉटर एड कार्यक्रम के प्रमुख एरिक हार्वे को उम्मीद है कि यह काम आगे भी जारी रहेगा, जिससे सभी को साफ़ पीने का पानी उपलब्ध हो। (सभी फ़ोटो: वाटर एड/जोर्डी रुइज़ सिरेरा)